जज्बा हो तो दिव्यांग भी चढ़ सकते हैं पहाड़ पर

शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए पहाड़ चढ़ना चुनौती माना जाता है, लेकिन कोलकाता के बेलघरिया की एक स्वयंसेवी संस्था ने इस धारणा को तोड़ते हुए पुरुलिया के रघुनाथपुर स्थित जयचंडी पहाड़ पर चार दिवसीय पर्वतारोहण प्रशिक्षण शिविर शुरू किया है.

पुरुलिया.

शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए पहाड़ चढ़ना चुनौती माना जाता है, लेकिन कोलकाता के बेलघरिया की एक स्वयंसेवी संस्था ने इस धारणा को तोड़ते हुए पुरुलिया के रघुनाथपुर स्थित जयचंडी पहाड़ पर चार दिवसीय पर्वतारोहण प्रशिक्षण शिविर शुरू किया है.

शिविर में 5 से 24 वर्ष आयु वर्ग के 37 विशेष रूप से सक्षम बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. संस्था के अनुसार, पिछले सात वर्षों से जयचंडी, अयोध्या पहाड़ के गजाबुरु और हुरड़ा के तिलाबनी पहाड़ पर ऐसे शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ाना है. प्रशिक्षण को दो चरणों में बांटा गया है, जिसमें पहले चरण में पहाड़ चढ़ने की बुनियादी तकनीकें सिखायी जा रही हैं, जबकि दूसरे चरण में विशेष सक्षम पर्वतारोहियों की प्रेरक सफलताओं से बच्चों को अवगत कराया जा रहा है. प्रशिक्षक अनिर्वाण मजूमदार ने बताया कि विशेष जरूरतमंद बच्चों को प्रशिक्षण देना कठिन और जोखिमपूर्ण है, इसलिए उन्हें हाथ पकड़कर हर कदम सिखाना पड़ता है.

कैंप कमांडर मलय बंदोपाध्याय के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद बच्चों को प्राकृतिक पर्यावरण से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनमें प्रकृति के प्रति लगाव विकसित हो. शिविर में बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी शामिल हैं. अभिभावक नमिता पांडे और सबरी मंडल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके बच्चे पहाड़ चढ़ पाएंगे, लेकिन प्रशिक्षण से बच्चों में आत्मविश्वास और खुशी साफ दिखाई दे रही है.

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Author: AMIT KUMAR

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