Pandabeswar Election Controversy| दुर्गापुर/पांडवेश्वर, संतोष कुमार : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से पहले पश्चिम बर्धमान जिले की पांडवेश्वर विधानसभा सीट पर सियासी घमासान छिड़ गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी के खेमे ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है. हाई-प्रोफाइल शिकायत के बाद आसनसोल लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इस विधानसभा सीट पर चुनावी गर्मी चरम पर पहुंच गयी
भाजपा का आरोप- ‘लाभ के पद’ पर रहकर लड़ रहे चुनाव
भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र तिवारी के चुनाव एजेंट सुशील कुमार टुडू ने रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिखकर नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के नामांकन पर गंभीर सवाल उठाये हैं.
- क्या है शिकायत : आरोप है कि नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती वर्तमान में ‘आसनसोल माइंस बोर्ड ऑफ हेल्थ’ के चेयरमैन और पश्चिम बर्धमान ‘आरटीए’ (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) के सदस्य हैं.
- कानूनी पेच : शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 191(1)(a) और पार्लियामेंट प्रिवेंशन ऑफ डिस्क्वालिफिकेशन एक्ट 1959 का हवाला दिया गया है. भाजपा का दावा है कि ये दोनों पद ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ (लाभ के पद) के दायरे में आते हैं. इसलिए नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाते हैं.
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नरेंद्र नाथ की सफाई : समय रहते दे चुका हूं इस्तीफा
अपनी उम्मीदवारी पर उठे सवालों और विपक्षी हमलों के बीच नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित करार दिया. उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2026 को ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. उसी दिन उसे स्वीकार भी कर लिया गया. 26 मार्च को उन्होंने जिलाधिकारी को आरटीए (RTA) सदस्य के पद से इस्तीफा भेज दिया था. उन्होंने इस्तीफे में स्पष्ट लिखा था कि वे 2026 का चुनाव लड़ने जा रहे हैं. इसलिए पद छोड़ रहे हैं.
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अब रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर टिकी निगाहें
नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती का कहना है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है और नामांकन से पहले ही पदों से मुक्त हो चुके थे. दूसरी ओर, भाजपा नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) के दौरान ही उनकी उम्मीदवारी खारिज करवाने पर अड़ी है. पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच अब यह चर्चा का विषय है कि क्या ‘कागजी सबूत’ चक्रवर्ती की चुनावी नैया पार लगा पायेंगे या भाजपा की शिकायत कोई बड़ा उलटफेर करेगी.
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