कुनुस्तोड़िया में 40 साल पुरानी पानी टंकी से बीमारियों को दावत, 25 वर्षों से नहीं हुई है सफाई

इसीएल के कुनुस्तोड़िया एरिया अंतर्गत कुनुस्तोड़िया कोलियरी प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहाँ कोयला कर्मियों के आवासों में पानी सप्लाई करने वाली मुख्य टंकी की साफ-सफाई वर्षों से नहीं की गई है.

जामुड़िया.

इसीएल के कुनुस्तोड़िया एरिया अंतर्गत कुनुस्तोड़िया कोलियरी प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहाँ कोयला कर्मियों के आवासों में पानी सप्लाई करने वाली मुख्य टंकी की साफ-सफाई वर्षों से नहीं की गई है. आलम यह है कि 1983 में बनी इस टंकी की स्थिति अब जर्जर हो चुकी है और इसमें जमा गंदगी ईसीएल कर्मियों एवं उनके परिजनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है.

दो दशक से अधिक समय से नहीं हुई धुलाई

क्षेत्र के निवासी और बैंक कर्मी आफताब अंसारी ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं, लेकिन उनके सामने आज तक कभी भी इस पानी टंकी की सफाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि 40 साल से अधिक पुराने इस ढांचे के माध्यम से लगभग 600 आवासों में पानी भेजा जाता है. नियमित सफाई के अभाव में लोग दूषित पानी के इस्तेमाल को मजबूर हैं, जो भविष्य में किसी बड़ी महामारी का कारण बन सकता है.

नियमों की अनदेखी: बिना फिल्टर सीधे सप्लाई हो रहा खदान का पानी

कोलियरी के पंप ऑपरेटर मोहम्मद ओकेश ने बताया कि नियमों के मुताबिक पानी की टंकी में समय-समय पर ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन और नमक का छिड़काव अनिवार्य है ताकि कीटाणुओं को मारा जा सके. परंतु यहाँ किसी भी नियम का पालन नहीं हो रहा है. खदान से निकला पानी सीधे टंकी में आता है और वहीं से बिना किसी शुद्धिकरण प्रक्रिया के सीधे पाइपलाइन के जरिए कर्मियों के घरों में भेज दिया जाता है.कई जगहो पर तो काई जमा हो चुकी है.

600 घरों की सेहत दांव पर

लगभग 2 हजार लीटर क्षमता वाली इस टंकी से होने वाली सप्लाई का उपयोग लोग पीने (उबालकर), स्नान करने, बर्तन और कपड़े धोने जैसे सभी घरेलू कार्यों में करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे बार-बार प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकर्षित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. स्थानीय लोगों ने इसीएल प्रबंधन से मांग की है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अविलंब टंकी की सफाई करायी जाये और भविष्य के लिए एक रोस्टर तैयार कर नियमित क्लोरिनेशन सुनिश्चित किया जाये.

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Author: AMIT KUMAR

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