आसनसोल.
आज की आसनसोल नॉर्थ सीट को पहले आसनसोल नाम से जाना जाता है. वर्ष 2011 में यह सीट आसनसोल से आसनसोल नॉर्थ बनी. इस सीट का अलग इतिहास रहा है. आसनसोल सीट पर यहां के मतदताओं ने किसी भी पार्टी के उम्मीदवार का जड़ जमने नहीं दिया. वर्ष 1952 से 2006 तक 54 वर्षो के इतिहास में सिर्फ दो बार माकपा उम्मीदवार को इस सीट पर लगातार जीत मिली, अन्यथा हर बार चुनाव में मतदाता यहां से विधायक बदल देते थे. इस दौरान कुल 14 बार विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें 11 अलग-अलग लोग विधायक बने. वर्ष 2011 में यह सीट आसनसोल से आसनसोल नॉर्थ बन गया. इसके बाद से तीन बार चुनाव हुआ और तृणमूल के मलय घटक लगातार जीतते रहे. इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगनेवाले श्री घटक पहले उम्मीदवार हैं. इसबार फिर से श्री घटक तृणमूल की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. उनका मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार कृष्णेन्दू मुखर्जी, भाकपा उम्मीदवार अखिलेश कुमार सिंह और कांग्रेस के प्रसेनजीत पुईतंडी के साथ है.आसनसोल सीट का क्या है इतिहास
वर्ष 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव से ही आसनसोल सीट अस्तित्व में है. उस दौरान यह बर्दवान जिला में था. वर्ष 2017 में बर्दवान जिला का विभाजन हुआ और पूर्व बर्दवान व पश्चिम बर्दवान जिला बना. वर्तमान समय के पश्चिम बर्दवान जिला इलाके में वर्ष 1952 के चुनाव के दौरान तीन सीट आसनसोल, रानीगंज और कुल्टी था. वर्ष 1967 में कुल नौ सीट बना और आज तक नौ सीट ही हैं. डिलिमिटेशन के दौरान कुछ जगहों को इधर-उधर किया गया और सीटों के नाम में बदलाव हुआ. आसनसोल सीट का नाम वर्ष 2011 के चुनाव के दौरान बदल कर आसनसोल नॉर्थ बना.आसनसोल सीट पर भाकपा उम्मीदवार दो बार बने हैं विधायक
आसनसोल सीट पर वर्ष 1962 के चुनाव में भाकपा उम्मीदवार विजय पाल और वर्ष 1972 के चुनाव में निरंजन धीबर यहां से जीत दर्ज की थी. वर्ष 1977 में अंतिम बार भाकपा के उम्मीदवार निरंजन धीबर यहां से चुनाव लड़े थे. वह पिछली बार के विधायक थे, उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उसके बाद भाकपा वाममोर्चा की घटक दल बन गयी. उसके बाद से इस सीट पर माकपा उम्मीदवार ही चुनाव लड़ते रहे. वर्ष 1977 के बार पहली बार भाकपा उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और तीसरी बार जीत की तलाश है.इस सीट पर कांग्रेस ने चार बार दर्ज की है जीत
आसनसोल सीट पर वर्ष 1957, वर्ष 1967, वर्ष 1987 और वर्ष 1996 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को यहां से जीत मिली थी. माकपा के बाद कांग्रेस यहां सबसे अधिक बार जीती है. वर्ष 2016 के चुनाव में अंतिम बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार यहां से उतारा था. इसबार पुनः उम्मीदवार उतारा है. कांग्रेस का अपना अलग जनाधार इस क्षेत्र में है. कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में प्रसेनजीत पुईतंडी के मैदान में उतरने से यहां का चुनाव और अधिक रोचक बना गया है.वर्ष 1991 के चुनाव में पहली बार भाजपा ने दिखायी मजबूती
वर्ष 1991 के चुनाव में पहली बार भाजपा ने अपना उम्मीदवार बजरंगी गुप्ता को आसनसोल सीट पर उतारा. श्री गुप्ता की धमाकेदार एंट्री रही. इस साल माकपा उम्मीदवार का सीधा मुकाबला भाजपा से हुआ. कुल 12 उम्मीदवार मैदान में थे. भाजपा दूसरे स्थान पर रही. माकपा को 43,844 वोट और भाजपा को 31,602 वोट मिला. इसके बाद 1996, 2001, 2006 और 2011 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे. वर्ष 2016 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार निर्मल कर्मकार और वर्ष 2021 में कृष्णेन्दू मुखर्जी दूसरे स्थान पर रहे. इसबार फिर से कृष्णेन्दू मुखर्जी को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है. भाजपा को इस सीट पर पहली जीत की तलाश है.आसनसोल सीट पर कब रहा है किसका कब्जा
वर्ष 1952 में आसनसोल सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक (रुईकार) के उम्मीदवार अतिंद्रनाथ बोस जीत दर्ज करके यहां के पहले विधायक बने. वर्ष 1957 के चुनाव में कांग्रेस के शिबदास पाल, वर्ष 1962 के चुनाव में भाकपा के विजय पाल, वर्ष 1967 के चुनाव में कांग्रेस के गोपिकारंजन मित्रा, वर्ष 1969 के मध्यवधि चुनाव में माकपा के लोकेश घोष, वर्ष 1971 के मध्यवधि चुनाव में माकपा के लोकेश घोष भाकपा के निरंजन धीबर को पराजित कर दूसरी बार यहां से विधायक बने. वर्ष 1972 के मध्यवधि चुनाव में निरंजन धीबर ने माकपा उम्मीदवार विजय पाल को पराजित कर दूसरी बार यह सीट भाजपा के कब्जे में किया. वर्ष 1977 के चुनाव में माकपा के विजय पाल विजयी हुए और भाकपा उम्मीदवार निरंजन धीबर अंतिम स्थान (चौथे) पर रहे.वर्ष 1982 में माकपा के उम्मीदवार विजय पाल लगातार दूसरी बार यहां के विधायक बने. वर्ष 1987 में कांग्रेस के प्रबुद्ध लाहा, वर्ष 1991 के माकपा के गौतम रायचौधरी, वर्ष 1996 में कांग्रेस के तापस बनर्जी, वर्ष 2001 में तृणमूल के कल्याण बनर्जी, वर्ष 2006 में माकपा के पवित्र रंजन मुखर्जी यहां से जीत दर्ज की. वर्ष 2011 में यह सीट आसनसोल नॉर्थ बना और अबतक कुल तीन बार वर्ष 2011, वर्ष 2016 तथा वर्ष 2021 के चुनावों में तृणमूल के टिकट पर लगातार मलय घटक जीतते रहे हैं. इसबार भी वे मैदान में हैं.
