बीरभूम से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट
बीरभूम जिला परिषद की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है. जिला परिषद के समाधिपति काजल शेख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा बर्धमान डिविजनल कमिश्नर के कार्यालय ने स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी को अगले पांच दिनों के भीतर सभापति की सभी जिम्मेदारियां अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया गया है.
शुक्रवार को होना था अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान
मिली जानकारी के अनुसार, काजल शेख के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के ही जिला परिषद सदस्यों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की गयी थी. शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना था. हालांकि, मतदान से एक दिन पहले ही काजल शेख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद जिला परिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गयी है.
अविश्वास प्रस्ताव से पहले इस्तीफा
काजल शेख के खिलाफ पार्टी के ही सदस्यों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा था. शुक्रवार को प्रस्ताव पर मतदान होना था, लेकिन उससे पहले ही काजल शेख के इस्तीफा देने से पूरी तस्वीर बदल गयी. प्रशासनिक आदेश में काजल शेख के इस्तीफे को स्वीकार किये जाने की जानकारी दी गयी है. साथ ही जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी को समाधिपति की जिम्मेदारियां संभालने का निर्देश दिया गया है.
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जिला परिषद में संख्या बल को लेकर भी चर्चा
बीरभूम जिला परिषद में कुल 52 सदस्य हैं. इनमें 51 सदस्य तृणमूल कांग्रेस और एक सदस्य कांग्रेस के बताए गये हैं. इनमें से एक सदस्य की मृत्यु के बाद वर्तमान में सदस्यों की संख्या 51 रह गयी है. ऐसे में राजनीतिक हलकों में संख्या बल को लेकर भी चर्चा तेज हो गयी है. काजल शेख के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से ठीक पहले उनका पद छोड़ना कई सवाल खड़े कर रहा है. अब जिला परिषद की अगली व्यवस्था और नए सभापति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है.
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