जामुड़िया की सड़कें बनीं ‘मौत का कुआं’
चाकदोला मोड़ से जामुड़िया बाजार तक जर्जर सड़क ने राहगीरों और मजदूरों की बढ़ायी मुश्किल
जामुड़िया. मेले में बीस रुपये का टिकट लेकर ‘मौत का कुआँ’ देखना रोमांच हो सकता है, लेकिन जामुड़िया के औद्योगिक क्षेत्र में यह रोमांच रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है. यहां की सड़कें सुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा जाल में तब्दील हो चुकी हैं. चाकदोला मोड़ से जामुड़िया बाजार तक का लगभग 7 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरी तरह जर्जर हालत में है.
प्रशासनिक उपेक्षा के आरोप
सड़क के कई हिस्सों में पिच उखड़ चुकी है और जगह-जगह गहरी खाइयां बन गई हैं. हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से स्थानीय विधायक, पुलिस प्रशासन और ब्लॉक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रोजाना गुजरते हैं. इसके बावजूद सड़क की बदहाली पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है.भारी वाहनों से बढ़ी समस्या
स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही ने सड़क की हालत और खराब कर दी है. उनका कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र कहलाने वाला जामुड़िया आज बदहाली का शिकार है और राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर उदासीन बनी हुई है.विधायक का पक्ष
जामुड़िया के विधायक हरे राम सिंह ने कहा कि सड़क की खराब स्थिति को लेकर जिला मजिस्ट्रेट को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है. औद्योगिक क्षेत्र के व्यवसायियों ने सड़क को चार लेन बनाने की मांग की है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है. 7 किलोमीटर के इस खतरनाक सफर से लोगों को राहत कब मिलेगी, यह अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है. अब देखना यह है कि प्रशासन कब सक्रिय होता है और जामुड़िया को इस जानलेवा समस्या से मुक्ति मिलती है.जनजीवन और उद्योग पर असर
यह सड़क जामुड़िया की अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी मानी जाती है. बहादुरपुर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग और भूमि सुधार कार्यालय इसी मार्ग पर स्थित हैं. औद्योगिक क्षेत्र के करीब 50 कारखानों में काम करने वाले हजारों मजदूर रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं. स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र भी हर दिन दुर्घटना के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं.
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