सत्ता से दूर आधी आबादी, उम्मीदवारी में ही समानता नहीं
आसनसोल दुर्गापुर महकमा क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर आधी आबादी को उम्मीदवारी में बराबर की भागीदारी नहीं मिली. वर्ष 1952 से इस क्षेत्र में चुनाव हो रहा है. वर्ष 2021 तक हुए कुल 17 चुनावों में यहां के सीटों से 796 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिसमें महिलाओं की संख्या मात्र 37 है.
आसनसोल दुर्गापुर महकमा क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर आधी आबादी को उम्मीदवारी में बराबर की भागीदारी नहीं मिली. वर्ष 1952 से इस क्षेत्र में चुनाव हो रहा है. वर्ष 2021 तक हुए कुल 17 चुनावों में यहां के सीटों से 796 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिसमें महिलाओं की संख्या मात्र 37 है. वर्ष 1982 के चुनाव के पहले तक इस क्षेत्र की किसी भी सीट पर कोई भी पार्टी किसी महिला को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया और ना ही निर्दल के रूप में कोई महिला मैदान में उतरी. वर्ष 1982 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बाराबनी सीट पर पहली महिला उम्मीदवार के रूप में सरस्वती देवी को मैदान में उतारा. इस सीट पर लड़ रहे छह उम्मीदवारों में से सरस्वती देवी चौथे स्थान पर रही. जिला में पहली महिला उम्मीदवार के चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड सरस्वती देवी के नाम पर दर्ज है. उसके बाद से हर चुनाव में कुछ सीटों पर महिलाओं की भागीदारी हुई, लेकिन वह काफी नगण्य रही.
नौ सीटों वाले पश्चिम बर्दवान जिले में वर्ष 2011 में पहली बार एक महिला बनी विधायक
वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में जामुड़िया सीट पर माकपा ने महिला उम्मीदवार जहांआरा खान को मैदान में उतारा. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी तृणमूल के प्रभात राय को परास्त कर जिला में पहली महिला विधायक बनने का गौरव पाया. वर्ष 2016 के चुनाव में भी माकपा ने जामुड़िया सीट से जहांआरा को अपना उम्मीदवार बनाया और दूसरी बार वे तृणमूल के वी. शिवदासन दासू को हरा कर विधायक बनीं. वर्ष 2021 के चुनाव में माकपा ने जामुड़िया सीट से आइशी घोष को अपना उम्मीदवार बनाया, जिन्हें हार झेलनी पड़ी. जिला में दो बार महिला विधायक बनने का रिकॉर्ड जहांआरा खान के नाम पर आज भी बरकरार है.
वर्ष 2021 में हुई पहली बार दो महिलाओं के बीच हुई चुनावी जंग
वर्ष 2021 में जिला के नौ सीटों में से सबसे रोचक मुकाबला आसनसोल दक्षिण सीट पर था. यहां भाजपा ने अग्निमित्रा पाल को और तृणमूल ने सायनी घोष को मैदान में उतारा. भाजपा पहली बार और तृणमूल दूसरी बार जिले के किसी सीट पर महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था. अग्निमित्रा पाल यहां से विजयी हुईं और जिला में दूसरी महिला विधायक बनीं. इस बार में चुनाव में भी वह भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं, यदि वह जीतती हैं, तो जहांआरा खान के रिकॉर्ड की बराबरी करेंगी.
सबसे अधिक 13 महिलाएं निर्दल से लड़ी यहां चुनाव
वर्ष 1952 से वर्ष 2021 तक कुल 17 बार के चुनाव में अबतक 13 महिलाएं विभिन्न साल के चुनावों में निर्दल उम्मीदवार के रूप में मैदान में लड़ी हैं. छह महिलाओं को माकपा और छह को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया. तृणमूल दो, भाजपा एक, जनता दल एक, जेएमएम एक, बसपा एक, एबीएम दो, एसयूसीआइ एक, बीएमपीयू तीन और आरपीपीआरआइएनएटी एक महिला को अपना टिकट दिया है.
किस चुनाव में कितने उम्मीदवार रहे मैदान में
वर्ष 1952 में आसनसोल दुर्गापुर क्षेत्र में सिर्फ तीन सीट आसनसोल, रानीगंज और कुल्टी थी. तीन सीटों पर 33 उम्मीदवार मैदान में थे. एक भी महिला नहीं. वर्ष 1957 में हीरापुर और जामुड़िया सीट बनने से सीटों की संख्या बढ़कर पांच हुई. 35 उम्मीदवार मैदान में थे, एक भी महिला नहीं. वर्ष 1962 में दुर्गापुर और बाराबनी सीट बनने से सीटों की संख्या बढ़कर सात हुई और 28 उम्मीदवार मैदान में, महिला एक भी नहीं. वर्ष 1967 के चुनाव में फरीदपुर और उखड़ा सीट बनने से सीटों की संख्या बढ़कर नौ हुई, जो अबतक नौ ही है. इसबार कुल 31 उम्मीदवारों मैदान में, महिला एक भी नहीं. वर्ष 1969 के मध्यवधि चुनाव में 23, वर्ष 1971 के मध्यवधि चुनाव में 39, वर्ष 1972 के मध्यवधि चुनाव में 26 उम्मीदवार, वर्ष 1977 के चुनाव में 43 उम्मीदवार मैदान में थे, एक भी महिला उम्मीदवार की भागीदारी इन चुनावों में नहीं रही. वर्ष 1982 के चुनाव में 53 उम्मीदवार में एक महिला, वर्ष 1987 के चुनाव में 63 उम्मीदवार में एक महिला, वर्ष 1991 के चुनाव में 85 उम्मीदवारों में चार महिला, वर्ष 1996 के चुनाव में 87 उम्मीदवारों में आठ महिला, वर्ष 2001 के चुनाव में 46 उम्मीदवारों में दो महिला, वर्ष 2006 के चुनाव में 36 उम्मीदवारों में पांच महिला, वर्ष 2011 के चुनाव में 38 उम्मीदवारों में तीन महिला, वर्ष 2016 के चुनाव में 59 उम्मीदवारों में सात महिला और वर्ष 2021 के चुनाव में कुल 71 उम्मीदवारों में छह महिला उम्मीदवार शामिल थी.
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