कसाई नदी पर बांस का अस्थायी पुल, स्थायी पुल की मांग फिर तेज

वर्ष 2016 में पूर्व पश्चिमी अंचल विकास परिषद के मंत्री शांति राम महतो ने पुल निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया था और एक निजी संस्था ने काम भी शुरू कर दिया था.

स्थानीय लोगों ने स्वर्गीय राम पद महतो के नाम पर रखा पुल का नाम

पुरुलिया. वर्षों से पुरुलिया प्रखंड एक अंतर्गत कांटाबेरा और बामुंडीहा गांव के लोगों की मांग थी कि कसाई नदी पर एक पुल का निर्माण कराया जाये. वर्ष 2016 में पूर्व पश्चिमी अंचल विकास परिषद के मंत्री शांति राम महतो ने पुल निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया था और एक निजी संस्था ने काम भी शुरू कर दिया था. लेकिन अचानक निर्माण कार्य रुक गया, जिससे नदी के दोनों ओर बसे करीब 10 से 12 गांवों के लोगों को खासकर बरसात के दिनों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के दिनों में इन गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह से कट जाता है. झारखंड या पुरुलिया सदर अस्पताल तक पहुंचने के लिये भी सात किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है. कई बार ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर आंदोलन भी किया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला.

अस्थायी पुल से शुरू हुई आवाजाही

आखिरकार ग्रामीणों ने अपनी जरूरत को देखते हुए खुद बांस से अस्थायी पुल तैयार किया. रविवार को कांटाबेरा और बामुंडीहा गांव के बीच कसाई नदी पर बने इस पुल का नाम आंदोलन से जुड़े स्वर्गीय राम पद महतो के नाम पर रखा गया. इस दिन से ही इस बांस के पुल से लोगों की आवाजाही शुरू हो गयी. ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दोनों ओर बसे गांवों के लोग रोजमर्रा के कामों, चासरोड मोड़ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक जाने या व्यापार के लिये नदी पार करते हैं. गर्मियों में नदी में पानी कम होने पर किसी तरह लोग पार कर जाते हैं, लेकिन बरसात में यह नामुमकिन हो जाता है.

पहले भी बारिश के दिनों में अस्थायी पुल बनाया गया था, लेकिन नदी के तेज बहाव में वह बह गया था. ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण कार्य दोबारा शुरू करे, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो.

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Published by: Ganesh mahto

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