छोटन ने किया कमाल, बना दिया मानव-वाहक ड्रोन

दामोदर के रेगिस्तान में उड़ा कर किया सफल परीक्षण

दामोदर के रेगिस्तान में उड़ा कर किया सफल परीक्षण

अविनाश यादव, दुर्गापुर

शादी समारोह हो या पार्टी संगठन का सभा, सम्मेलन लोगो की भीड़ एवं मंच पर लोगो का संबोधन को कैमरा में कैद करने के लिए अक्सर ड्रोन कैमरा को सभी ने देखा होगा. लेकिन ड्रोन पर मानव को बैठकर उड़ान भरने वाला मानव वाहक ड्रोन को हर किसी को अचंभित कर देगा. ऐसा ही मानव वाहक ड्रोन दुर्गापुर का छोटन घोष नामक युवक ने विकसित कर मिसाल कायम कर दिया है. छोटन द्वारा बनाए गए मानव वाहक ड्रोन इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म में इस ड्रोन को देख काफी वाहवाही लूटी जा रही है. इस ड्रोन में चार उच्च गति वाले पंखे के ब्लेड शीट चारों ओर लगे हैं. साइकिल के हैंडल बार से स्टीयरिंग, और बैटरी से संचालित होकर यह ड्रोन एक व्यक्ति के साथ उड़ान भर रहा है. छोटन घोष दुर्गापुर के धुब चुरिया गांव का निवासी है. पेशे से वह फूल सजाने का काम करते हैं. हाई स्कूल से दसवीं पास होने के बाद, उन्होंने अपने पिता के साथ गैराज में काम करना शुरू किया.

वहीं से छोटन की तकनीकी शिक्षा की शुरुआत हुई. गैरेज में काम करते हुए सामान्य ड्रोन को देख छोटन के दिल में उस पर बैठकर आसमान मे उड़ान भरने की चाहत जगी. उसके बाद वह ड्रोन बनाकर दामोदर नदी पर उड़ाकर प्रारंभिक सफल परीक्षण किया. छोटन ने बताया कि ड्रोन की संरचना लोहे की मजबूत चादरों से बनी है. सभी तरफ चार उच्च गति वाले पंखे के ब्लेड लगाए गए हैं. ड्रोन में 3,500 आर.पी.एम. की मोटर लगी हुई है. पंखा से मदद से ड्रोन घूमता है. मोटर को चालू करने के लिए 24 वोल्ट की बैटरी लगाई गई है. ड्रोन के बीच में एक व्यक्ति के लिए सीट बनाई गई है. स्टीयरिंग साइकिल का हैंडल से बनाया गया है.

इसमें पिकअप बढ़ाने के लिए एक एक्सीलेटर भी शामिल है. जिससे ड्रोन को बाएं और दाएं की ओर घुमाया जा सकता है. छोटन ने कहा कि अगर सड़क पर ट्रैफिक जाम है, तो आपको परेशानी उठानी पड़ती है. अगर इस ड्रोन से आप हवा में उड़कर पार करते हैं, तो आप ट्रैफिक जाम से बच सकते हैं. उन्होंने बताया कि बचपन से ही

आसमान में उड़ने की प्रबल इच्छा थी. इसलिए अभी हमने शुरुआती तौर पर यह ड्रोन बनाया है. दामोदर चर में पहली टेस्ट फ्लाइट ली गई. यह ड्रोन ड्राइवर के साथ करीब 8 फीट ऊंचाई पर उड़ सकता है.

एक बार चार्ज करने पर यह साढ़े तीन किलोमीटर तक जाएगा. अभी इसे बालू के रेगिस्तान (चर ) में उड़ाकर टेस्ट किया गया है. आगे के टेस्ट के लिए ड्रोन को मैन्युअली उड़ाया जाएगा. ड्रोन को और अपग्रेड किया जाएगा ताकि इसे जन बहुल इलाके में उड़ाया जा सके.

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Published by: Sandip tiwari

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