गिरफ्तारी के 57 दिन बाद,सीबीआई ने अनुब्रत के खिलाफ पशु तस्करी मामले में 35 पन्नों की चार्जशीट की दाखिल

पश्चिम बंगाल में पशु तस्करी मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल की परेशानी और बढ़ गयी है. 57 दिनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के खिलाफ 35 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है.

पश्चिम बंगाल में सीबीआई अनुब्रत मंडल को लेकर लगातार नये तथ्यों का खुलासा कर रही है जिसकी वजह से पशु तस्करी मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल की परेशानी और बढ़ गयी. 57 दिनों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने पशु तस्करी मामले में बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में 35 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गयी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को आसनसोल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. केंद्रीय जांच एजेंसी ने तीन सप्लीमेंट्री चार्जशीट समेत कुल चार चार्जशीट दाखिल की हैं. शुक्रवार को केवल अनुब्रत मंडल के नाम पर चार्जशीट दाखिल की गई.चार्जशीट में उनका नाम मुख्य प्रायोजक के तौर पर दर्ज है.

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 अनुब्रत मंडल की संपत्ति का ब्यौरा ले रही है सीबीआई 

11 अगस्त की सुबह सीबीआई ने बोलपुर के निचुपट्टी इलाके में केंद्रीय बलों के साथ अनुब्रत के घर पर छापेमारी की थी. बाद में अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया था उसके बाद सीबीआई ने अनुब्रत मंडल की संपत्ति का ब्यौरा लेना शुुरू किया था. केंद्रीय जांचकर्ताओं ने दावा किया है कि इस मामले की जांच के दौरान अनुब्रत और उनके करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों में 18.97 करोड़ रुपये मिले हैं. इसके अलावा, कोलकाता और बीरभूम में अनुब्रत की दिवंगत पत्नी चित्रा मंडल और बेटी सुकन्या मंडल के नाम पर कई संपत्तियां सीबीआई की निगरानी में हैं. जांचकर्ताओं को बोलपुर में अनुब्रत के रिश्तेदारों के नाम से कई चावल मिलें भी मिली हैं.हालांकि अनुब्रत का दावा है कि उनके नाम पर कोई बेनामी संपत्ति नहीं है.

अनुब्रत के बॉडीगार्ड से पूछ-ताछ के लिए ईडी की टीम पहुंची आसनसोल जेल

पशु तस्करी मामले में गिरफ्तार अनुब्रत मंडल के बॉडीगार्ड सहगल हुसैन से पूछताछ करने शुक्रवार सुबह ईडी की एक टीम आसनसोल जेल पहुंची. बता दें कि ईडी ने हुसैन को रिमांड पर लेने की मांग अदालत से की थी पर अदालत ने उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था. हालांकि उन्हें जेल में ही जाकर पूछताछ की अनुमति दे दी थी.अदालत के आदेश से ईडी के अधिकारी हुसैन से पूछ-ताछ कर यह जानने का प्रयास करेंगे की पशु तस्करी का रुपया उसके पास कैसे पहुंचता था और उन रुपयों को वह किसे-किसे देता था. फिलहाल पूछताछ जारी है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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