कोयलांचल का सियासी मिजाज : आसनसोल दक्षिण में फिर खिलेगा कमल या होगी तृणमूल की वापसी?

Asansol South Assembly Seat: बंगाल चुनाव की तारीख करीब आ गयी है. कोयलांचल का मिजाज क्या कह रहा है? आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट पर फिर खिलेगा कमल या होगी तृणमूल कांग्रेस की वापसी? पढ़ें लेटेस्ट अपडेट.

Asansol South Assembly Seat: पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र अगर कोलकाता है, तो इसकी औद्योगिक धड़कन आसनसोल है. राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र हिंदीभाषी प्रभाव वाला औद्योगिक क्षेत्र है. आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया. अब यह सीट बंगाल की सबसे ‘हाई-प्रोफाईल’ सीटों में एक है. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के बाद से ही यहां के ‘सियासी अखाड़े’ में दांव-पेच और आंकड़ों का खेल शुरू हो गया है. बिहार और झारखंड से जुड़े उन लाखों लोगों के लिए, जिनकी जड़ें इस कोयलांचल में हैं, यह चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है.

परिसीमन के बाद से बदलती राजनीतिक विरासत

आसनसोल दक्षिण का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन इसकी राजनीतिक उथल-पुथल की रोमांचक कहानी बिल्कुल अलग है. वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद पुराने आसनसोल क्षेत्र को उत्तर और दक्षिण में बांटा गया. इस क्षेत्र में आसनसोल नगर निगम के 22 वार्ड और रानीगंज खंड की 5 ग्राम पंचायतें हैं.

2011 और 2016 में तृणमूल का दबदबा

शुरुआती 2 चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी ने यहां एकतरफा जीत दर्ज की थी. उन्होंने सीपीएम के मजबूत गढ़ को ढाहते हुए वर्ष 2011 में 28,000 से अधिक और 2016 में 14,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

2021 में उल्टा पड़ा ‘स्टार’ दांव

वर्ष 2021 के बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक जोखिम भरा फैसला लिया. उन्होंने दो बार के विजेता तापस बनर्जी को रानीगंज भेज दिया. यहां से अभिनेत्री सायोनी घोष को मैदान में उतारा. यह दांव टीएमसी को भारी पड़ा. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की फैशन डिजाइनर से राजनेता बनीं अग्निमित्रा पॉल ने 4,487 वोटों के अंतर से भगवा झंडा लहरा दिया.

हिंदी भाषी मतदाता के पास जीत की चाबी

आसनसोल दक्षिण की सबसे बड़ी विशेषता इसका जनसांख्यिकीय ढांचा है. यहां लगभग 35 से 40 प्रतिशत मतदाता हिंदी भाषी हैं, जिनका सीधा जुड़ाव बिहार और झारखंड (Bihar-Jharkhand Connection) से है. भाजपा की इस क्षेत्र में पैठ बढ़ने का एक प्रमुख कारण यही ‘प्रवासी’ वोट बैंक है.

  • 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 21,062 वोटों की बढ़त ली थी.
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बढ़त बढ़कर 53,820 हो गयी.
  • 2024 के लोकसभा चुनावों में यह बढ़त घटकर 12,157 रह गयी.

इसे भी पढ़ें : अग्निमित्रा पॉल की संपत्ति 5 साल में हुई डबल, दर्ज हैं 22 आपराधिक मामले

औद्योगिक संकट और आर्थिक धरातल

रानीगंज कोलफील्ड का हिस्सा होने के नाते यहां की अर्थव्यवस्था कोयला, इस्पात (IISCO) और रेलवे के इर्द-गिर्द घूमती है. लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में मशीनीकरण और विनिवेश की आशंकाओं के कारण नौकरियों में भारी कमी आयी है. दामोदर नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र आज भी सिंचाई और औद्योगिक प्रदूषण की दोहरी मार झेल रहा है. वर्ष 2026 के बंगाल चुनाव में ‘बेरोजगारी’ और ‘बंद होती खदानें’ एक बड़ा चुनावी मुद्दा हैं.

आसनसोल दक्षिण का ट्रेंड (2011 से 2021)

वर्षविजेता उम्मीदवारपार्टीनिकटतम प्रतिद्वंदीजीत का अंतर
2011तपस बनर्जीTMCआलोक कुमार मुखर्जी (CPM)28,541
2016तापस बनर्जीTMCहेमंत प्रभाकर (CPM)14,283
2021अग्निमित्रा पॉलBJPसायोनी घोष (TMC)4,487

आसनसोल दक्षिण : वोटर डेमोग्राफी

कुल मतदाता (2021)2,74,245
शहरी मतदाता94.45 प्रतिशत
ग्रामीण मतदाता5.55 प्रतिशत
हिंदी भाषी35-40 प्रतिशत
मुस्लिम मतदाता12.30 प्रतिशत
अनुसूचित जाति (SC)20.56 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति (ST)6.50 प्रतिशत

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव पर असर

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Interactive Revision) शुरू से विवादों में रहा. आसनसोल दक्षिण में मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि होती रही. वर्ष 2016 में 2.47 लाख वोटर थे, जो 2021 में बढ़कर 2.74 लाख हो गये. 2026 की अंतिम सूची अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन मतदाताओं की संख्या कम होने की उम्मीद है. अगर वोटर कम होते हैं, तो इसका असर चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है.

इसे भी पढ़ें : आसनसोल दक्षिण में चढ़ा चुनावी पारा, अग्निमित्रा व तृणमूल नेता सिदान में तीखी नोक-झोंक

नये समीकरण : हुमायूं कबीर और ध्रुवीकरण की राजनीति

बंगाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रमों ने नये समीकरण पैदा कर दिये हैं. टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का गठन कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सिरदर्द बना बढ़ा दिया है. आसनसोल दक्षिण में करीब 12.3 प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं. हुमायूं कबीर की पार्टी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाती है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में हुई हिंसा और उसके बाद का ध्रुवीकरण भी वोटर के मिजाज को बदल सकता है.

2026 में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना

आसनसोल दक्षिण में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है. हालांकि, मुख्य मुकाबला भाजपा और तृणमूल के बीच ही होगा. भाजपा अपने ‘मिशन बंगाल’ को लेकर आश्वस्त है. उसे उम्मीद है कि बंगाल से केरल तक उसकी सरकार बनेगी. दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने और संगठन को मजबूत करने में जुटी है. इस बीच, अग्निमित्रा पॉल के लिए चुनौती अपनी बढ़त को बरकरार रखने की है, जबकि तृणमूल के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गयी है.

आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र कब अस्तित्व में आया?

आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद पुराने आसनसोल विधानसभा को विभाजित करके बनाया गया.

2021 के चुनाव में यहां से किसने जीत हासिल की थी?

भाजपा की उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस की सायोनी घोष को 4,487 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी.

इस क्षेत्र में हिंदीभाषी मतदाताओं की क्या भूमिका है?

आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में लगभग 35-40 प्रतिशत मतदाता हिंदीभाषी हैं, जो मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से ताल्लुक रखते हैं. चुनाव परिणाम में इनकी बड़ी भूमिका होती है.

आसनसोल दक्षिण की अर्थव्यवस्था किन उद्योगों पर टिकी है?

यह क्षेत्र मुख्य रूप से कोयला खनन (रानीगंज कोलफील्ड), इस्पात कारखानों (IISCO) और रेलवे वर्कशॉप पर निर्भर है.

हुमायूं कबीर की नयी पार्टी का चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?

हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ मुस्लिम वोटों को विभाजित कर सकती है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है. अगर ऐसा होता है, तो इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है.

इसे भी पढ़ें

बंगाल में 91 लाख वोटर ‘गायब’, 120 सीटों का बिगड़ा गणित! SIR ने उड़ायी टीएमसी और भाजपा की नींद

बंगाल में ममता का ‘चौका’ या भाजपा का ‘परिवर्तन’? 294 सीटों का पूरा गणित और 2 चरणों का चुनावी शेड्यूल, यहां जानें सब कुछ

बंगाल चुनाव 2026: भितरघात और SIR का घातक कॉकटेल, 120 सीटों पर बिगड़ सकता है दिग्गजों का खेल!

विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल की इन 294 सीटों पर होगी वोटिंग, एक-एक सीट का नाम यहां देखें

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >