लेफ्ट का कभी था दबदबा, आज तृणमूल का गढ़, आसान नहीं मलय घटक को आसनसोल में हराना

Asansol North Assembly: मलय घटक को तृणमूल कांग्रेस का 'संकटमोचक' माना जाता है. खासकर पश्चिम बर्धमान और आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद या सांगठनिक चुनौती को हल करने में उनकी भूमिका निर्णायक होती है. उनकी सादगी और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाता है.

Asansol North Assembly : कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में आसनसोल विधानसभा सीट पर लंबे समय तक वामदलों का कब्जा रहा , लेकिन पिछले तीन चुनावों में यहां से तृणमूल की जीत होती रही है. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस आसनसोल नार्थ की सीट को सबसे सुरक्षित सीट मान रही है, लेकिन भाजपा के पास 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार की कम अंतर से हार से उत्साहित होने की वजह है. भाजपा की सफलता हिंदी बोलने वाले वोटरों के बीच सपोर्ट पाने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटरों में बड़ी सेंध लगाने की उसकी कोशिशों पर निर्भर करेगी. तृणमूल कांग्रेस को लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन के फिर से बनने की भी उम्मीद है, जो उसके सपोर्ट बेस में सेंध लगा सकता है. दोनों मुख्य खिलाड़ियों के बीच एक दिलचस्प और कांटे की टक्कर के लिए मंच तैयार है.

मलय घटक चौका लगाने को तैयार

पश्चिम बंगाल विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर 1951 से 2006 के बीच आसनसोल असेंबली सीट पर ज्यादातर लेफ्ट पार्टियों का दबदबा रहा, जिन्होंने इसे 14 में से नौ बार जीता, कांग्रेस पार्टी ने चार बार और तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी की शुरुआत के तुरंत बाद 2001 में अपनी पहली जीत हासिल की. 2011 में आसनसोल उत्तर चुनाव क्षेत्र बनने के बाद, तृणमूल कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री मलय घटक पार्टी उम्मीदवार के तौर पर जीत का सिलसिला लगातार बनाए रखा है. 2011 में, घटक ने माकपा की रानू रायचौधरी को 47,793 वोटों के अंतर से हराया था. भाजपा, जिसे 2011 में सिर्फ 4.37 प्रतिशत वोट मिले थे, मुख्य चुनौती बनकर उभरी. घटक ने 2016 में भाजपा के निर्मल करमाकर को 23,897 वोटों से और 2021 में भाजपा के कृष्णेंदु मुखर्जी को 21,110 वोटों से हराया था.

2001 में जीता था पहला चुनाव

मलय घटक का राजनीतिक जीवन दशकों पुराना है. वह शुरू से ही आसनसोल क्षेत्र के श्रमिक आंदोलनों और स्थानीय मुद्दों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने पहली बार 2001 में आसनसोल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था. हालाँकि 2006 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2011 के ऐतिहासिक परिवर्तन के चुनाव में उन्होंने आसनसोल उत्तर सीट से शानदार जीत दर्ज की. तब से, वह लगातार 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में इसी निर्वाचन क्षेत्र से विजयी होते आ रहे हैं. 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही वह कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है, जिनमें श्रम विभाग, कृषि विपणन विभाग और वर्तमान में कानून एवं लोक निर्माण विभाग शामिल हैं. उनके कार्यकाल के दौरान आसनसोल और औद्योगिक बेल्ट में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है.

नामवोट
मलय घटक1,00,931
कृष्णेंदु मुखर्जी79,821
विजेता पार्टी का वोट %52.3
जीत अंतर %10.9
स्रोत: चुनाव आयोग

ममता सरकार के कानूनी स्तंभ

आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में मलय घटक का नाम औद्योगिक और कानूनी जानकार के रूप में आता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी सहयोगियों में शुमार मलय घटक न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि राज्य के कानूनी और श्रम संबंधी मामलों के सबसे बड़े रणनीतिकार भी माने जाते हैं. प्रारंभिक जीवन और वकालत का सफर मलय घटक का जन्म पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक शहर आसनसोल में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय सती नाथ घटक थे, जिनसे उन्हें समाज सेवा के संस्कार विरासत में मिले. उन्होंने साइंस ग्रेजुएट करने के बाद कानून की पढ़ाई की. राजनीति में पूर्णकालिक आने से पहले वे आसनसोल कोर्ट के एक प्रतिष्ठित वकील थे. कानून की इसी गहरी समझ ने आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर को एक नई दिशा दी.

मलय घटक वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार में कौन से पद पर हैं?

वे पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री हैं और कानून, न्यायिक (Law & Judicial) तथा श्रम (Labour) विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

मलय घटक किस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं?

वे पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल उत्तर (Asansol Uttar) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है?

मलय घटक ने विज्ञान में स्नातक (B.Sc.) और कानून (LL.B.) की डिग्री हासिल की है.

मलय घटक किस राजनीतिक दल से संबंधित हैं?

वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के वरिष्ठ नेता हैं.

क्या वे राजनीति में आने से पहले वकील थे?

उत्तर: हाँ, राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे आसनसोल में एक सफल और प्रतिष्ठित वकील के रूप में कार्यरत थे.

वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आए हैं?

मलय घटक वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार में कानून एवं न्यायिक विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रभारी मंत्री हैं. वे मुख्य रूप से आसनसोल उत्तर (Asansol Uttar) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

मलय घटक ने अपनी शिक्षा कहाँ से पूरी की?

उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के तहत कानून की पढ़ाई की और एलएल.बी की डिग्री प्राप्त की.

क्या मलय घटक पहले भी मंत्री रह चुके हैं?

हाँ, 2011 से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के सभी तीन कार्यकालों में वह कैबिनेट मंत्री रहे हैं और उन्होंने श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी संभाले हैं.

प्रशासनिक अनुभव और मंत्रालय

मलय घटक की राजनीति का केंद्र हमेशा से आसनसोल रहा है. औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिकों और आम जनता की समस्याओं को करीब से देखा और उनके हक के लिए आवाज उठाई. वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के उन शुरुआती नेताओं में से हैं, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के पश्चिमी हिस्से में पार्टी की जड़ों को मजबूत किया. आसनसोल नार्थ विधानसभा क्षेत्र उनकी कर्मभूमि है, जहाँ से वे बार-बार भारी मतों से निर्वाचित होते रहे हैं.

मंत्री के रूप में बेहतर काम

2011 में जब पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ, तब से मलय घटक ममता बनर्जी की कैबिनेट का अनिवार्य हिस्सा रहे हैं. वर्तमान में वे राज्य के कानून और न्यायिक तथा श्रम विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं. एक श्रम मंत्री के रूप में, उन्होंने राज्य के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और चाय बागान मजदूरों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की हैं. वहीं, कानून मंत्री के तौर पर उन्होंने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अदालतों के बुनियादी ढांचे को सुधारने में अहम भूमिका निभाई है.

मलय घटक की मुख्य विशेषताएं

  1. औद्योगिक क्षेत्र की आवाज : आसनसोल उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से लगातार विधायक और क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली नेता.
  2. दोहरी जिम्मेदारी : वर्तमान में राज्य के कानून, न्यायिक और श्रम विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री.
  3. कानूनी विशेषज्ञ : पेशे से वकील (LL.B.) होने के कारण वे सरकार के कानूनी मामलों में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं.
  4. श्रमिकों के मसीहा : श्रम मंत्री के तौर पर ‘सामाजिक सुरक्षा योजना’ जैसी पहलों के माध्यम से लाखों मजदूरों को लाभ पहुँचाया.
  5. मजबूत सांगठनिक पकड़ : पश्चिम बर्धमान जिले में तृणमूल कांग्रेस के संगठन को मजबूती देने वाले मुख्य रणनीतिकार.
  6. लंबा अनुभव : ममता बनर्जी की तीनों सरकारों (2011, 2016, 2021) में कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवा.
  7. व्यवसाय : राजनीति में आने से पहले वह एक पेशेवर वकील थे.
  8. निर्वाचन क्षेत्र : वह आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
  9. प्रमुख पद : पश्चिम बंगाल सरकार में कानून और लोक निर्माण मंत्री.
  10. राजनीतिक दल : अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सदस्य.
  11. शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून स्नातक (LL.B).
  12. प्रभाव : आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक संगठनों के बीच उनकी गहरी पैठ मानी जाती है.

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By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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