पीड़ित को समस्या पर सीधे पुलिस कमिश्नर से मिलने की नसीहत

सेल आइएसपी बर्नपुर में 35 हजार करोड़ का निवेश शुरू होते ही खेल

अभिज्ञान डीलकॉम प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने स्थानीय थाना में की शिकायत, कार्रवाई नहीं होने पर की थी पुलिस आयुक्त से अपील

आसनसोल. सेल आइएसपी बर्नपुर सिंडिकेट राज के खिलाफ मिली शिकायत को पुलिस आयुक्त(सीपी) सुनील कुमार चौधरी ने खुद संज्ञान में लिया और पीड़ित, निजी संस्था के प्रतिनिधि रिभू बोस के साथ बैठक की. उन्होंने श्री बोस को कहा कि कोई समस्या होती है और स्थानीय पुलिस अधिकारी यदि मदद नहीं करते हैं तो सीधे उनसे आकर मुलाकात करें. वे मदद करेंगे. इलाके में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस लोगों की मदद करने को तैनात है.

गजरतलब है कि सेल आइएसपी बर्नपुर के आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण के लिए केंद्र सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया है. इसका कार्य वर्ष 2029 तक पूरा होना है. इस आधुनिकीकरण कार्य के लिए करीब 60 फीसदी कार्य का टेंडर हो चुका है और बाकी 40 फीसदी के कार्य का टेंडर दिसंबर माह तक हो जाएगा. नये प्लांट का ढांचा खड़ा करने के लिए दो लाख पाइलिंग (नींव की एक प्रक्रिया) के कार्य का टेंडर हुआ है. एक पाइलिंग कार्य का रेट 2.30 लाख रुपये है. कुल 4600 करोड़ रुपये का ठेका अनेकों बड़ी-बड़ी कम्पनियों को मिला है. यह कम्पनियां अब सब कांटेक्ट के जरिये अन्य संस्थाओं को कार्य दे रही है. इसी कार्य को लेकर सिंडिकेट अपना वर्चस्व कायम करने में जुटा है. जिसे लेकर ठेका पानेवाली कंपनियों को डराया धमकाया जा रहा है.

सिंडिकेट का निशाना बने अभिज्ञान डीलकॉम के प्रतिनिधि

हुटनी प्रोजेक्ट्स एफएम (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड संस्था ने 1500 पाइलिंग के कार्य का टेंडर हासिल किया है और कुछ संस्थाओं को सब कांटेक्ट में यह कार्य दिया है. जिसमें अभियान डीलकॉम प्राइवेट लिमिटेड एक है. इसे 5.56 करोड़ रुपये का काम मिला है. अभियान संस्था के प्रतिनिधि श्री बोस का आरोप है कि सिंडिकेट के लोग उन्हें धमकी दे रहे हैं कि ताकि वे यहां से काम छोड़कर चले जाएं. जिससे स्थानीय एक संस्था को सीधा इसका लाभ मिलेगा. जिन कंपनियों को सीधे ठेका मिला है, वे भी डरी हुई हैं. उन्हें भी काम सिंडिकेट को देने के लिए डराया जा रहा है. काम करने के लिए जब वे अपना मशीन लेकर कारखाना गेट के बाहर गाड़ी चालक को बेरहमी से पीटा गया, मोबाइल छीन लिया गया. इसकी शिकायत स्थानीय थाना में करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई. सारे सबूत होने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई. जांच के लिए आये अधिकारी खानापूर्ति करके चले गये. इसकी शिकायत पुलिस आयुक्त से की गयी. उन्होंने इस मामले को संज्ञान में लिया और बुलाकर बैठक की. जिसमें उन्होंने हर प्रकार से मदद का आश्वासन दिया. सिंडिकेट के लोगों के कारण यहां आतंक का माहौल बना हुआ है. 35 हजार करोड़ रुपये का कार्य होनेवाला है. कुछ विदेशी कम्पनियों को भी टेंडर मिला है. स्थिति यही रही तो फिर आगामी दिनों में काफी समस्या हो सकती है. हालांकि पुलिस आयुक्त ने सकारात्मक आश्वासन दिया है.

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Published by: Ganesh mahto

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