हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूलों में माध्यमिक परीक्षा का रिजल्ट बांग्ला स्कूलों की तुलना में काफी खराब है. इसे चुनौती के रूप में लेने तथा इस शर्मनाक स्थिति को गर्व में बदलने के स्थान पर शिक्षक प्रभारी व गाजिर्यन के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है.
आसनसोल : रेलपार चांदमारी स्थित हिंदी माध्यम सरकारी स्कूल बालबोधन हाइ स्कूल के शिक्षक प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की कमी और इस वर्ष माध्यमिक परीक्षार्थियों के बैच में अनुशासित विद्यार्थी न मिलने के कारण माध्यमिक परीक्षा के परिणाम आशानुरूप नहीं हुए. उन्होंने कहा कि इस बार की माध्यमिक परीक्षा में स्कूल के कुल 207 परीक्षार्थी शामिल हुए जिनमें 102 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं. जो काफी निराशाजनक है.
उन्होंने बताया कि इस बार की माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुए विद्यार्थी काफी अनुशासनहीन आचरण के थे. पढ़ाई को लेकर उनमें कोई उत्साह नहीं था. शिक्षकों के आदेश की अवमानना करना रोज की आदत थी. मना करने के बाद भी उनके हाथों में अक्सरहां मोबाइल फोन देखे जाते थे.
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पढ़ाई में कम और फेस बुक, व्हाट्स एप्प में दोस्तों के साथ ज्यादा मशगूल दिखते थे. व्हाटस एप्प और मोबाइल फोन के अति व्यवहार ने विद्यार्थियों को बर्बाद किया. उन्होंने बताया कि वे आगे से अपने विद्यार्थियों पर निगरानी रखेंगे, कमजोर छात्रों को विशेष कक्षाएं देंगे, होम वर्क बनाने को लेकर नजर रखेंगे, अनुशासन हीन छात्रों के साथ सख्ती से निबटेंगे, बात न मानने वाले छात्रों के अभिभावकों के साथ बैठक करेंगे. उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है. विद्यालय में कुल 1800 विद्यार्थी हैं. एक सेक्शन में एक सौ से अधिक छात्र हैं.
जबकि एक सेक्शन में चालीस छात्र होने चाहिए. स्कूल में गणित, भूगोल, जीव विज्ञान, इतिहास, वर्क इडूकेशन विषयों के कुल सात शिक्षकों की कमी है. इसको लेकर संबंधित अधिकारी को रोस्टर भी भेजे गये हैं परंतु कोई लाभ नहीं हुआ. इधर स्कूल के स्टूडेंट्सों व उनके गाजिर्यनों का कहना है कि हिंदी माध्यम के स्कूलों के रिजल्ट खराब होने के लिए छात्रों को ही मुख्य जिम्मेवार बताना गलत है. उन्होंने कहा कि बांग्ला हाइ स्कूल के सभी छात्र मेघावी नहीं होते. इसके बाद भी उनका रिजल्ट बैहतर होता है.
उन्होंने कहा कि जमीनी सच्चाई है कि वे अधिक संपन्न नहीं है. दिन रात आर्थिक उपाजर्न में लगे रहते हैं. लेकिन शिक्षकों को तो अपना दायित्व निभाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति कभी गंभीर नगीं रहते हैं. रूटीन की तरह कार्य करते हैं. किसी भी स्टूडेंट्स का विवरण उनके पास नहीं होता. शिक्षण में उनकी दिलचस्पी ही नहीं होती है.
बच्चों को बेहतर शिक्षम माहौल देना स्कूल के शिक्षकों व टीचर इंचार्ज का दायित्व है. यदि कोई छात्र कमजोर है तो उसके प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखायी जाती है. उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप के बजाय शिक्षकों को अपने दायित्वों के प्रति गंभीर होना चाहिए. यदि वे जागरूक होते तथा सुविधा संपन्न होते तो वे खुद ही शैक्षणिक माहौल दे देते.
