संशय. अगस्त तक मिल सकेगा नया डीएम!
बर्दवान जिले का पुनर्गठन कर नये जिले के गठन का निर्णय राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में लिया जा चुका है. लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद इसका भविष्य आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमीश्नरेट क्षेत्र के नौ विधानसभा क्षेत्रों के रिजल्ट पर टिक गया है. रिजल्ट बेहतर होने पर अगस्त तक नया जिलाशासक अन्यथा मामला ठंडे बस्ते में जायेगा.
आसनसोल : विधानसभा चुनाव के दौरान बर्दवान जिले के सभी 25 विधानसभा क्षेत्रों मे ं दो चरणों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. सरकार गठन के लेकर अटकलें व गणना जारी है. लेकिन सरकारी सूत्रों की माने तो बर्दवान जिले का विभाजन कर आसनसोल-दुर्गापुर कमीश्नरेट क्षेत्र को अलग जिला गठन की प्रक्रिया इन 25 क्षेत्रों के चुनाव परिणाम पर निर्भर करता है. यदि सत्ताशीन तृणमूल का बेहतर प्रदर्शन रहा तथा सरकार गठन के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी तो अगस्त तक जिला को स्वतंत्र स्वरुप मिलना शुरू हो जायेगा. अन्यथा यह मामला ठंडे बस्ते में चला जायेगा.
काफी पुरानी रही है मांग
बर्दवान जिला का विभाजन कर आसनसोल जिला गठन की मांग काफी पुरानी रही है. जन दबाब के बाद विधान सभा की तीन-तीन कमेटियां गठित हुयी. हर कमेटी ने बर्दवान जिला के पुनर्गठन कर नये जिला गठन की अनुशंसा की. लेकिन वाममोर्चा सरकार ने इन जिलों का तो पुनर्गठन कर दिया, लेकिन बर्दवान के मामले में कोई पहल नहीं की गयी. माकपा नेतृत्व ने हमेशा इस मांग को दबाने का प्रयास किया. वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल- कांग्रेस गंठबंधन की सरकार बनी. बाद में कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया.
इस दौरान भी बर्दवान जिले के पुनर्गठन का मामला उठता रहा. आखिरकार इस सरकार ने भी इस मामले में पहल शुरू की. जन सुनवाई की गयी. विधानसभा में इसका प्रारूप पेश किया गया. विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले राज्य सरकार के केबिनेट ने इसकी औपचारिक मंजूरी भी दे दी. हालांकि जिला गठन की प्रक्रिया के तहत कई विभागों के जिला कार्यालय आसनसोल में संचालित होने लगे हैं. इनमें पुलिस व स्वास्थ्य विभाग प्रमुख हैं.
चुनाव आयोग ने किया शोकॉज
विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में आसनसोल में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुश्री बनर्जी ने कहा था कि सरकार गठन के बाद वे बर्दवान जिला का विघटन कर दो जिलों का गठन करेगी. इसे विपक्ष ने आचार संहिता के उल्लंघन का मामला बता कर चुनाव आयोग से शिकायत कर दी.
आयोग ने इस संबंध में सुश्री बनर्जी को शोकॉज कर दिया. उन्होंने इसका जबाब भी दिया. लेकिन इसके बाद कई चुनावी सभाओं में उन्होंने दोहराया कि उन्होंने जो कुछ भी कहा है, सही कहा है और बार-बार कहती रहेंगी. मुख्यमंत्री के बतौर इस मुद्दे को लेकर आयोग ने उनके खिलाफ पहला शोकॉज जारी किया था.
चुनाव परिणाम पर भविष्य निर्भर
सूत्रों की माने तो नये जिले का भविष्य बर्दवान जिले खास कर पुलिस कमीश्नरेट के नौ विधानसभा क्षेत्रों के रिजल्ट पर निर्भर करेगा. यदि तृणमूल की सरकार गठित नहीं हुयी तो यह मामला वैसे ही ठंडे बस्ते में जायेगा. नयी सरकार इस निर्णय की समीक्षा में ही कई महीने लगा देगी. यदि तृणमूल की सरकार गठित भी हो गयी तो रिजल्ट निर्णायक बनेगा. पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल के हिस्से में इन नौ सीटों में से सात सीटे थी, जबकि माकपा के पास दो सीटें थी.
यदि एक-दो सीटों का अंतर हुआ तो कोई बड़ी बात नहीं होगी, लेकिन सीटों की संख्या अधिक घटी तो भी यह मामला ठंडे बस्ते में जायेगा. इसके पहले भी हिंदी माध्यम कॉलेज के मामले में ऐसा हो चुका है. संसदीय चुनाव से पहले इसकी घोषणा तय हो गयी थी. लेकिन आसनसोल संसदीय क्षेत्र से पार्टी की हार के बाद सरकार ने इसे स्थगित कर दिया था. चुनाव के बाद बर्दवान की बैठक में जब मुख्यमंत्री के समक्ष यह मामला मंत्री मलय घटक ने उटाया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि आसनसोल को बहुत कुछ दिया जा चुका है.
यदि हिंदी माध्यम कॉलेज खोलना पड़ा भी तो यह पुरुलिया में खोला जायेगा. सनद रहे कि आसनसोल की तर्ज पर पुरुलिया भी झारखंड की सीमा पर है. यदि सब कुछ सही रहा तो अगस्त के अंत तक नये जिलाशासक की घोषणा की जा सकती है.
