दुखद. अराजक स्थिति में बढ़ने लगा है रेल हॉकरों, आरपीएफ का टकराव
आसनसोल मंडल में रेल हॉकरों व आरपीएफ के बीच टकराव खतरनाक स्थिति में पहुंचने लगा है. लाठी चार्ज, पथराव के बाद रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचा है. मेमू में सवार यात्री घायल होने से बचे हैं. इस स्थिति में सभी संबंधित पक्षों को एक साथ बैठक कर इसका समाधान करना चाहिए.
आसनसोल : बगैर लाइसेंस के रेल स्टेशनों तथा चलन्त ट्रेनों में हॉकरी करनेवाले हजारों हॉकरों के साथ रेलवे सुरक्षा बल का टकराव खतरनाक स्थिति में पहुंचने लगा है. हर तरह का आंदोलन करने के बाद भी समस्या का समाधान न होने पर हॉकर हताशा में उग्र होने लगे हैं. यदि सभी संबद्ध पक्षों के स्तर से पहल कर इस टकराव का स्थायी समाधान न किया गया तो कभी भी कोई हादसा हो सकता है. मंगलवार को हुए टकराव में सामान्य रेल यात्री भी फंस गये थे. हालांकि किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है.
आसनसोल मंडल में रेलवे सुरक्षा बल ने अवैध हॉकरी के खिलाफ लगातार अभियान चलाना शुरू किया है.
शुरूआती दौर में हॉकरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. हॉकरों ने पक ड़ेजाने के बाद जुर्माना भरना शुरू किया. लेकिन अभियान के सघन होने के बाद उन्होंने आंदोलन करने का फैसला किया. इसके लिए कमेटी का गठन किया गया. जुलूस निकाले गये. लेकिन मंडल रेल प्रशासन ने अभियान बंद करने से साफ-साफ इंकार कर दिया.
हॉकर किसी भी कीमत पर अपनी रोजी-रोटी बचाये रखना चाहते थे. उन्हें लगा कि रेल का मामला केंद्रीय सरकार से जुड़ा है.
उन्होंने इसके लिए भाजपा का दामन थाम लिया.
यूनियन का गठन किया तथा स्थानीय सांसद सह केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री बाबुल सुप्रिय को इस मामले में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की. शुरूआती दौर में समर्थन करने के बाद भी अंत में श्री सुप्रिय ने इसमें मदद करने मे ं असमर्थता जता दी. परिणामस्वरुप हॉकरों का गुस्सा उनके खिलाफ निकला. यूनियन टूट गयी. रेल हॉकरों ने उनका पुतला फूंका तथा महावीर मंदिर के पास स्थित भाजपा के कार्यालय में आग लगा दी.
इसके बाद हॉकरों ने सत्ताशीन तृणमूल का दामन थामा. आसनसोल शिल्पांचल जिलाध्यक्ष वी शिवदासन उर्फ दासू व मंत्री मलय घटक ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया. डीआरएम कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया, घेराव किया गया. लेकिन रेल प्रशासन ने अभियान रोकने में असमर्थता जता दी. हॉकर एकता समिति का गठन हुआ तथा कई तरह के आंदोलन चलाये गये. धरना, अनशन से लेकर भीख मांगने तक के आंदोलन हुए. लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला. इसके बाद हॉकरों ने सामूहिक गिरफ्तारियां देनी शुरू कर दी. बाद में आरपीएफ ने अभियान की गति कम की. इसके बाद फिर दोनों में टकराव हो गया. कुछ हॉक रों ने हताशा में रेल परिसर से बाहर मिले आरपीएफ के दो कर्मियों की पिटाई कर दी. आंदोलन अराजकता की ओर बढ़ने लगा. किसी तरह दोनों पक्षों के बीच तनाव कम हुआ.
लेकिन मंगलवार की घटना के बाद फिर से दोनों पक्षों के बीच तनाव गहरा गया है. रेल प्रशासन ने 40 हॉकरों के खिलाफ गैरजमानतीय धारा के तहत जीआरपी में प्राथमिकी दर्ज करा दी है. पथराव में बल के अधिकारी तो लाठी चार्ज में हॉकर घायल हुए है. हॉकरों को तृणमूल का समर्थन हासिल है.
यदि इस तनाव के बीच कुछ हॉकर हताशा में गलत निर्णय ले बैठे या इस टकराव का फायदा उठा कर आपराधिक तत्व कोई बड़ा हादसा कर बैठे तो दोनों पक्षों के साथ-साथ राज्य सरकार व रेल प्रशासन के लिए भी परेशानी बढ़ जायेगी. आक्रोश का मुख्य कारण यह है कि पूर्व रेलवे के अन्य मंडलों खास कर बर्दवान व बर्दवान के पूर्व के रेल खंड़ों तथा अन्य जोनल रेलवे में हॉकरों को हॉकरी की छूट मिली हुयी है. उनकी मांग है कि सभी जोन में समान नीति अपनायी जाये. दूसरी ओर आरपीएफ अधिकारी कर्त्तव्यबोध से बंधे हैं.
