दामोदर के गिरते जल स्तर के प्रति नागरिक सचेतनता बेहद जरूरी

आसनसोल : पश्चिम बंगाल तथा दामोदर नदी व बराकर नदी के उपरी इलाकों में पिछले मानसून में कम बारिश होने के कारण दामोदर घाटी निगम के मैथन जलाशय व पंचेत जलाशय में जल स्तर काफी गिर गया है. पिछले 11 वर्षो का आकलन करें तो सबके बदहाल स्थिति है. स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय […]

आसनसोल : पश्चिम बंगाल तथा दामोदर नदी व बराकर नदी के उपरी इलाकों में पिछले मानसून में कम बारिश होने के कारण दामोदर घाटी निगम के मैथन जलाशय व पंचेत जलाशय में जल स्तर काफी गिर गया है.
पिछले 11 वर्षो का आकलन करें तो सबके बदहाल स्थिति है. स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर डीवीसी ने जल निकासी में 50 फीसदी की कटौती शुरू कर दी है. जानकार सूत्रों की माने तो आसनसोल नगर निगम इलाके में जलापूत्तर्ि का मुख्य स्त्रोत दामोदर नदी ही है. इस स्थिति में नगर निगम प्रशासन के साथ-साथ शहर के निवासियों को भी जल संरक्षण व इसकी बर्बादी रोकने के लिए सक्रिय होना होगा.
सूत्रों ने बताया कि इन जलाशयों से होने वाली जल निकासी में हो रही कटौती के कारण दामोदर नदी का जल स्तर काफी कम हो गया है. इस कारण दुर्गापुर बैरेज पर भी पड़ा है. वहां की नहरों में जल प्रवाह लगातार कम होता जा रहा है तथा इस वर्ष बोरो धान की खेती खतरे में पड़ती दिख रही है. बर्दवान व हुगली जिलों के निचले इलाकों में स्थिति और खराब हो गयी है. सनद रहे कि बर्दवान की बोरो फसल इन नहरों के पानी पर ही निर्भर करता है.
उन्होंने कहा कि जनवरी में स्थिति यह है कि नगर निगम के कई इलाकों में जल संकट का असर दिखने लगा है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जायेगी, जल संकट भी उतना ही बढ़ता जायेगा. इसके लिए हर स्तर पर जागरूकता काफी जरूरी है. यदि पेयजल की बर्बादी नहीं रखी जायेगी तो मई-जून में स्थिति काफी खराब होने लगेगी.

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