दोषी पाये गये पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हो प्राथमिकी

अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग से सुधदेव रविदास ने लगायी गुहार पुलिस आयुक्त की जांच में दोषी पाये जाने की रिपोर्ट आयोग के पास आयोग ने मांगा था शिकायतकर्ता से पक्ष, विभागीय कार्रवाई है जारी आसनसोल : आसनसोल साउथ थाना अंतर्गत कुमारपुर निवासी सुधदेव रविदास ने अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग (नेशनल कमीशन फॉर श्यूडल कास्ट) के […]

अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग से सुधदेव रविदास ने लगायी गुहार
पुलिस आयुक्त की जांच में दोषी पाये जाने की रिपोर्ट आयोग के पास
आयोग ने मांगा था शिकायतकर्ता से पक्ष, विभागीय कार्रवाई है जारी
आसनसोल : आसनसोल साउथ थाना अंतर्गत कुमारपुर निवासी सुधदेव रविदास ने अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग (नेशनल कमीशन फॉर श्यूडल कास्ट) के रिसर्च ऑफिसर ए भट्टाचार्या को पत्र लिख कर पुलिस अधिकारी संजय चक्रवर्त्ती व अनन्या दे के खिलाफ प्रीवेनशन ऑफ एट्रोसिटीज ऑफ श्यूडल कास्ट/ श्यूडल ट्राइव एक्ट, 1955 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की अपील की है. इस मामले में आयोग ने शिकायतकत्र्ता श्री रविदास से अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था.
क्या है मामला
शिकायतकत्र्ता श्री रविदास ने आयोग से शिकायत की थी कि तत्कालीन आसनसोल साउथ थाना प्रभारी श्री चक्रवर्त्ती व आसनसोल साउथ थाना पीपी प्रभारी सुश्री दे ने उनसे पांच लाख रुपये की मांग की थी. वे अपने परिवार के सदस्यों के साथ रियल स्टेट व लोहे के स्क्रैप का व्यवसाय करते हैं.
उन्होंने कहा था कि जब उन्होंने यह राशि देने से इंकार किया तो उनके व उनके भाइयों व कर्मियों के खिलाफ डकैती की योजना बनाने व आर्म्स एक्ट के तहत झूठी प्राथमिकी दर्ज की गयी. उन्हें जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल पर बेहद अपमानित किया गया व बुरे अंजाम की धमकी दी गयी. जांच के नाम पर बुला कर गिरफ्तार किया गया.
बाद में कोर्ट ने सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया था. उनकी इस शिकायत को गंभीरता से लेत हुए आयोग ने इस मामले की जांच का दायित्व पुलिस आयुक्त को सौंपा था. तत्कालीन पुलिस आयुक्त अजय नंद ने इस संबंध में आयोग को जांच प्रतिवेदन भेजा था. जांच में पुलिस अधिकारियों को दोषी मानते हुए कहा गया था कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आयोग ने श्री रविदास से उनका पक्ष मांगा था.
क्या कहा है अपने पक्ष में
श्री रविदास ने कहा है कि इस मामले की जांच में दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उनके द्वारा लगाये गये सभी आरोपों को सही पाया गया है. पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है. लेकिन उनकी शिकायत प्रीवेनशन ऑफ एट्रोसिटीज ऑफ श्यूडल कास्ट/ श्यूडल ट्राइव एक्ट, 1995 के प्रावधानों के उल्लंघन के खिलाफ है.
यह सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि बिना किसी स्टेशन डायरी के उनके गोदाम में छापेमारी करने तथा सीजर लिस्ट नहीं बनाने की भी पुष्टि जांच में हो चुकी है. यह भी स्पष्ट हो गया है कि उनके खिलाफ आसनसोल साउथ थाने में बीते आठ अप्रैल को दर्ज कांड संख्या 123/15 भी झूठा है. जांच अधिकारी ने पाया है कि भादवि का धारा 326 व 385 के तहत कोई साक्ष्य नहीं रहने के बाद भी तत्कालीन थाना प्रभारी श्री चक्रवर्त्ती के निर्देश पर केस के आइओ (जांच अधिकारी) ने आरोप पत्र में इन धाराओं का उल्लेख किया है.
प्राथमिकी के पक्ष में दी दलील
श्री रविदास ने कहा है कि पूरे मामले की समीक्षा में यह स्पष्ट हो जायेगा कि इन दो पुलिस अधिकारियों ने पुलिस के नियमों का उल्लंघन किया है. जबकि इनकी नियुक्ति इन नियमों के पालन के लिए की गयी है.
इन दोनों ने प्रीवेनशन ऑफ एट्रोसिटीज ऑफ श्यूडल कास्ट/ श्यूडल ट्राइव एक्ट, 1995 का भी उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने व क ड़ी सजा मिलने से अन्य कोई पुलिस अधिकारी इस तरह की गतिविधि से नहीं जुड़ेगा.

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