बर्नपुर में आयोजित हुई चित्रगुप्त पूजा

बर्नपुर : शिव स्थान में शुक्रवार को कायस्थ समाज ने चित्रगुप्त महाराज की सामूहिक पूजा की. बर्नपुर चित्रगुप्त समाज के सचिव अमिताभ श्रीवास्तव, अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, स्वाधीन श्रीवास्तव, गौतम श्रीवास्तव, अमर किशोर सहाय, शिवशंकर प्रसाद, बीके श्रीवास्तव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे. चित्रगुप्त समाज के सदस्य स्वाधीन श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1951 से […]

बर्नपुर : शिव स्थान में शुक्रवार को कायस्थ समाज ने चित्रगुप्त महाराज की सामूहिक पूजा की. बर्नपुर चित्रगुप्त समाज के सचिव अमिताभ श्रीवास्तव, अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, स्वाधीन श्रीवास्तव, गौतम श्रीवास्तव, अमर किशोर सहाय, शिवशंकर प्रसाद, बीके श्रीवास्तव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.
चित्रगुप्त समाज के सदस्य स्वाधीन श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 1951 से बर्नपुर चित्रगुप्त समाज इस पूजा को आयोजित करता रहा है. प्रति वर्ष कायस्थ समाज के लोग शिव स्थान मंदिर में एकत्रित होकर सामूहिक रूप से पूजा क रते है. इस दिन कलम दवात की पूजा की जाती है. पूजा के प्रारम्भ में कागज पर मंत्र ‘मासी भाजन संयुक्त सचरोसित्वम महीतले,लेखनी कटनी हस्ते चित्रगुप्त नमस्तुते’ लिखा गया. पांच देवताओ के नाम लिखे गये.
पूजा के बाद सारे दिन कलम दवात को कायस्थ समाज के लोग हाथ नहीं लगाते है. इस संदर्भ में प्रचलित पौराणिक लोक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वे इस संसार के कार्यभार को सुचारू रूप से चलाने क ो लेकर काफी परेशान हो गये थे. इस परेशानी में उनका समस्त शरीर पसीने से भर गया. जिससे एक काया उत्पन्न हुयी.
उनके मन में इस कार्य भार को सभांलने वाले का गुप्त चित्र बन रहा था. ब्रह्मा ने उसी को इस सृष्टि का लेखा जोखा रखने का दायित्व सौंप दिया. ब्रह्मा ने उसे काया से उत्पन्न आकृति का नाम चित्र गुप्त रखा. उसके वंशज ही कायस्थ कहलाये. चूंकि द्वितीया के दिन वे उत्पन्न हुये थे. इसलिये प्रति वर्ष इसी दिन उनकी पूजा अर्चना की जाती है. उन्होंने बताया कि कायस्थ समाज के सदस्यों ने सामूहिक रूप से रात्रि भोजन शिव स्थान परिसर में किया.

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