अनुशंसा पैनल को मिला स्टे

फरमान जारी : इसीएल के सीएमडी के चयन के मामले में आया नया मोड़ आसनसोल : कोलकाता हाइ कोर्ट ने इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के पद के लिए सेलेक्शन बोर्ड ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (एसबीपीइ) द्वारा तैयार पैनल को रद्द करने की किसी भी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. […]

फरमान जारी : इसीएल के सीएमडी के चयन के मामले में आया नया मोड़
आसनसोल : कोलकाता हाइ कोर्ट ने इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के पद के लिए सेलेक्शन बोर्ड ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (एसबीपीइ) द्वारा तैयार पैनल को रद्द करने की किसी भी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. सनद रहे कि इस पैनल में कंपनी के तकनीकी निदेशक (ऑपरेशन) सुब्रत चक्रवर्ती की अनुशंसा इस पद के लिए की गयी है.
कंपनी के आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस संबंध में कोलकाता हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस आशय का आदेश जारी किया है. इस संबंध में कोयला मंत्रालय के सचिव से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. ‘प्रभात खबर’ में छपी खबर के संबंध में आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि निर्धारित मानदंड़ों का पालन करते हुए श्री चक्रवर्त्ती का चयन सेलेक्शन बोर्ड ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (एसबीपीइ) ने इस पद के लिए किया था.
उनका ना म कंपनी के स्तर से अग्रसारित किये जाने के समय उनके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) या विजिलेंस की कोई जांच लंबित नहीं थी. कोल इंडिया ने स्पष्ट रूप से इसकी पुष्टि की थी. वैसे भी प्रावधान यह है कि इस स्तर के पद के लिए नियोजन प्रक्रिया शुरू होने के छह माह के भीतर यदि कोई शिकायत अभ्यार्थियों के खिलाफ होती है तो इसके कोई मायने चयन के लिए नहीं होते. सभी तथ्यों की जांच करने के बाद ही सीबीपीइ ने उनके नाम की अनुशंसा इस पद के लिए की थी. हालांकि पद रिक्त होने के बाद भी उन्हें इसके लिए केंद्रीय सरकार के स्तर से नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया तथा कोल इंडिया के वित्त निदेशक सीके डे को इसका अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है.
सूत्रों ने कहा कि इस मामले में श्री चक्रवर्त्ती को सरकार के स्तर से कोई आधिकारिक जानकारी भी नहीं दी गयी है कि किन कारणों से उनकी नियुक्ति इस पद पर नहीं की जा रही है. इससे संबंधित मामला हाइ कोर्ट में दायर किया गया है. कोर्ट ने इनकी अनुशंसा वाले पैनल को रद्द करने की किसी भी प्रक्रिया पर कोर्ट के अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है.

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