ज्वायंट एक्शन कमेटी की बैठक में यूनियन नेताओं ने तैयारियों की चर्चा की
सभी कोयला कंपनियों का विलय कर एक कंपनी गठित करने की रखी गयी मांग
कोयला खनन उद्योग में सौ फीसदी एफडीआई के निर्णय के खिलाफ हो रही हड़ताल
आसनसोल : केंद्र सरकार द्वारा कोयला खनन उद्योग में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के निर्णय को वापस लेने, कोल इंडिया के सभी अनुषांगिक कंपनियों को मिलाकर कोल इंडिया लिमिटेड के गठन करने और कोयला उद्योग में ठेकेदारी, आउटसोर्सिंग, माइनिंग डेवेलपर्स ऑपरेटर (एमडीओ) कोयला उत्खनन, संप्रेषण के कार्य को बंद कर उक्त कार्य में लगे सभी श्रमिकों को कोल इंडिया का मजदूर घोषित करने की तीन सूत्री मांग को लेकर 24 अगस्त को पूरे कोल इंडिया में एक दिन की आम हड़ताल की घोषणा करते हुए श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार को चिट्ठी भेज दी.
इसीएल में इस हड़ताल को सफल बनाने को लेकर शुक्रवार को चेलीडांगा में स्थित कोलियरी मजदूर सभा के मुख्यालय में जॉइंट एक्शन कमेटी (जैक) के नेताओं की बैठक हुई. जिसमें इस आंदोलन की सफलता की रणनीति को लेकर 12 अगस्त को आसनसोल गुजराती भवन में सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया. बैठक में पूर्व सांसद सह एटक नेता आरसी सिंह, सीटू के विवेक चौधरी, गिरीश श्रीवास्तव, इंटक के आरपी शर्मा, एचएमएस के विशुनदेव नोनिया, यूटीयूसी के माधब बनर्जी उपस्थित थे. बैठक की अध्यक्षता एचएमएस नेता एसके पांडे ने की.
पूर्व सांसद श्री सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में भाजपा की सरकार आते ही कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2015 को पारित कर न सिर्फ कोयला उद्योगों निजीकरण को लागू किया, बल्कि व्यवसायिक माइनिंग के नाम पर कोयला बेचने की छूट दे दी. कोल इंडिया के 63 हजार करोड़ रुपया से ज्यादा का आरक्षित फंड हड़प लिया.
आनुषांगिक कम्पनियों के कोष को भी शेयरों के बाई बैक करवाकर हड़प लिया. देश के विकास में तीन प्रतिशत की भागीदार अकेले कोल इंडिया निभाती है. ऐसे में इस संस्था के विकास के बजाय इसमें सौ फीसदी एफडीआई लागू कर देश के विकास को बाधित करने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है.
विदेशी कंपनियां यहां सिर्फ मुनाफा कमाने आएंगी. रोजगार सृजन और देश के विकास से उसका कोई लेना देना नहीं होगा. मोदी सरकार देश के हित के बजाय कुछ पूंजीपतियों के स्वार्थ में यह निर्णय लिया है. सरकार यदि अपने इस निर्णय को लागू करने में सफल हो गयी तो कोयला उद्योग पर घोर संकट आ जायेगा. श्रमिक, कर्मचारी, अधिकारी, ठेका श्रमिक किसी की भी रोजगार की कोई गारंटी नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि इसके विरोध में रांची में पांच सितंबर को सभी फेडरेशनों की बैठक में 24 सितंबर को एकदिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया गया है. इसीएल में इस हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति को लेकर शुक्रवार को जैक के नेताओं ने बैठक में 12 अगस्त को सम्मेलन का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि इस हड़ताल को सफल बनाने में सभी यूनियनों के सहयोग करने को लेकर बात की जा रही है. यह हड़ताल ही देश और श्रमिकों का भविष्य तय करेगी.
