पानागढ़ : आस्था, संगीत का संगम है जयदेव मेला

मकर संक्रांति पर लगनेवाले मेले में रातभर चलता है बाउल संगीत देश-विदेश के पर्यटक शामिल होते हैं इसमबाजार के इस आयोजन में अजय नदी में पवित्र स्नान के बाद राधा-गोविंद मंदिर में होती है पूजा पानागढ़ : बीरभूम जिले के इलमबाजार थाना के जयदेव केंदुली मेला में मकर संक्रांति पर आस्था और भक्ति का पारंपरिक […]

  • मकर संक्रांति पर लगनेवाले मेले में रातभर चलता है बाउल संगीत
  • देश-विदेश के पर्यटक शामिल होते हैं इसमबाजार के इस आयोजन में
  • अजय नदी में पवित्र स्नान के बाद राधा-गोविंद मंदिर में होती है पूजा
पानागढ़ : बीरभूम जिले के इलमबाजार थाना के जयदेव केंदुली मेला में मकर संक्रांति पर आस्था और भक्ति का पारंपरिक आकर्षण दिखता है. जयदेव मेले में देश-विदेश के पर्यटकों की भारी भीड़ जमा होती है.
अजय नदी किनारे मौजूद केंदुली गांव के जयदेव मेले में बाउल तथा लोक गायकों की आस्था और भक्ति का अद्भुत पारंपरिक आकर्षण उन्हें यहां खींच लाता है. संक्रांति पर अजय नदी में पवित्र स्नान करने के बाद राधा- गोविंद मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है.
सोमवार से ही मेला की सुरक्षा को लेकर पुलिस चौबंद हो गई है. बाउल व लोक गीतो की जो लहर रात भर बहती है,वह शीतलहरी और ठंड की कड़ाके को भूलाकर भक्तो को इस अखाड़ों में बांधे रहती है. बाउल गीतों को सुनने के लिए रात भर श्रोता बैठे रहते हैं.
अजय नदी में स्नान के बाद केला को फल और फूल के रूप में भक्त राधा -गोविंद के मंदिर में चढ़ाते हैं. कवि जयदेव की इस पावन भूमि पर मकर संक्रांति को आस्था और भक्ति का अद्भुत नमूना दिखता है. स्थानीय इलमबाजार पंचायत समिति ही इसका संचालन अन्य संस्थाओं की मदद से करती है.
प्रसाद के रूप में केला के कांदी भक्त अपने साथ ले जाते हैं. एक-दूसरे से पहचान नहीं होने के बावजूद इनके बीच एक ऐसा तारतम्य जुड़ जाता है कि मालूम ही नहीं पड़ता की यह अजनबी हैं.

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