11 सरकारी कंपनियों के शेयरों की बायबैक

सांकतोड़िया : चालू वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की 11 कंपनियों की शेयर बायबैक करने की तैयारी वित मंत्रालय ने शुरू कर दी है. इसकी सूची तैयार की जा चुकी है. इन कंपनियों में कोल इंडिया, एनटीपीसी, नालको, एनएमडीसी, एनएलसी, भेल, एनएचपीसी, एनबीसीसी, एसजेवीएन, केआईओसीएल और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि इस […]

सांकतोड़िया : चालू वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की 11 कंपनियों की शेयर बायबैक करने की तैयारी वित मंत्रालय ने शुरू कर दी है. इसकी सूची तैयार की जा चुकी है. इन कंपनियों में कोल इंडिया, एनटीपीसी, नालको, एनएमडीसी, एनएलसी, भेल, एनएचपीसी, एनबीसीसी, एसजेवीएन, केआईओसीएल और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स शामिल हैं.
सूत्रों ने कहा कि इस हफ्ते की शुरुआत में डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (डीआईपीएएम) ने कंपनियों से बायबैक के विकल्प पर चर्चा की थी. इसी के बाद यह सूची तैयार की गई है. डीआईपीएएम ने 27 मई, 2016 को तय कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग गाइड लाइंस के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को शेयर बायबैक के लिए कहा था. डीआईपीएएम के दिशानिर्देश के मुताबिक, कम से कम 2000 करोड़ रुपये के नेटवर्थ और 1000 करोड़ रुपये की नकदी व बैंक बैलेंस वाली कंपनियों को अनिवार्य रूप से बायबैक करना है.
यह भी कहा गया है कि वित्तीय वर्ष वर्ष की क्लोजिंग के बाद पहली बोर्ड बैठक में ही कंपनियां नकदी व बैंक बैलेंस, विस्तार योजना, कर्ज योजना, नेट वर्थ और शेयरों के बाजार मूल्य की समीक्षा करें और बायबैक की संभावना पर विचार करें. शेयर बायबैक से कंपनी के शेयरधारकों को पूंजी मिलती है और शेयर मजबूत होता है. इससे कंपनी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनती है.
सरकार ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए शुक्रवार को बोली आमंत्रित की. डीआईपीएएम ने इच्छुक बोलीदाताओं से अभिरुचि पत्र मंगाए हैं. इसके लिए 21 अक्तूबर अंतिम तिथि तय की गई है. इसमें भाग लेने वाली कंपनी की नेटवर्थ 31 मार्च, 2018 को कम से कम 50 करोड़ रुपये होनी चाहिए. रेलवे की सब्सिडियरी इरकॉन इंटरनेशनल में 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार 467 करोड़ रुपये जुटाएगी. इसके लिए आईपीओ लाया जाएगा.
आइपीओ का प्राइस बैंड 470 से 475 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. एयर इंडिया पर कर्ज का दबाव कम करने और फंड जुटाने के लिए सरकार एयरलाइन की सब्सिडियरी एआईएटीएसएल की रणनीतिक बिक्री पर विचार कर रही है. एआईएटीएसएल ग्राउंड हैंडलिंग सेवा प्रदान करती है. जून में वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुआई वाले मंत्रिसमूह ने एयर इंडिया को प्रतिस्पर्धी बनाने, कर्ज घटाने और संसाधन बढ़ाने के लिए लैंड एसेट व अन्य सब्सिडियरी कंपनियों की बिक्री का फैसला किया था. एआईएटीएसएल की बिक्री इसी का हिस्सा है. सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिसमूह की ओर से मंजूरी के बाद जल्द ही इच्छुक कंपनियों से अभिरुचि पत्र मंगाए जाएंगे.

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