आरोपी थानेदार के वकील ने किया हाईकोर्ट के स्थगन का दावा
आसनसोल : आसनसोल साउथ थाना के तत्कालीन थानेदार व इस समय अंडाल के थाना प्रभारी संजय चक्रबर्ती के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में चल रही सुनवाई करने अथवा उसपर स्थगन आदेश जारी करने को लेकर उच्च न्यायालय में दाखिल रिट याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद श्री चक्रबर्ती को थोड़ी राहत मिल गयी है.
अदालत के सिंगल बेंच के न्यायाधीश तापब्रत चक्रबर्ती ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की कार्यवाही पर चार माह का अंतरिम स्थगन आदेश जारी कर प्रतिवादी सभी पक्षों को चार सप्ताह के अंदर इस मामले पर अपना हलफनामा दायर करने को कहा. नवंबर, 2018 में पुनः सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध होगा.
श्री चक्रबर्ती के वकील डी पाल ने अदालत के निर्णय की जानकारी सभी प्रतिवादी पक्ष को भेजा है. प्रतिवादी सुद्धदेव रविदास के वकील नंदबिहारी यादव ने कहा कि अदालत की निर्णय की प्रति प्राप्त होने पर उसे अध्ययन करने के बाद डीविजन बेंच में इस निर्णय को चुनौती देंगे.
सनद रहे कि आसनसोल कुमारपुर इलाके के निवासी श्री रविदास ने 27 मई, 2015 को आसनसोल साउथ थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी संजय चक्रबर्ती और आसनसोल साउथ पीपी की प्रभारी अनन्या दे पर सार्वजनिक स्थल पर उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और थाने में प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर न्याय की मांग करते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग में शिकायत दर्ज करायी है.
लंबे समय से इस मामले की सुनवाई दिल्ली में चल रही है. पुनः छह अगस्त को होनी है. आयोग ने पुनः सभी संबंधित पक्षों को सम्मन कर बुलाया है.
मामले में श्री चक्रबर्ती ने आयोग के इस आदेश के खिलाफ कोलकाता उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर मामले को खारिज करने अथवा इसपर स्थगन आदेश जारी करने की अपील की. उन्होंने रास्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, आयोग के चेरपर्सन, राज्य के गृह मंत्रालय, आसनसोल दुर्गापुर पुलिस के पुलिस आयुक्त, पश्चिम बर्दवान के जिलाशासक और शुद्धदेव रविदास को मामले में प्रतिवादी बनाया है.
शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच के न्यायाधीश श्री चक्रबर्ती ने चार माह के लिए रास्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में चल रहे मामले पर स्थगन आदेश जारी करते हुए सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के अंदर पूरे मामले पर अपना हलफनामा दायर करने को कहा.
