उद्योग ने पहुंचाया ऊंचाइयों पर, सामाजिक कार्यों से बढ़ी साख

रानीगंज : लक्ष्य यदि निर्धारित हो तो व्यक्ति को सफलता अवश्य मिलती है. रानीगंज के वयोवृद्ध सफल उद्योगपति एवं समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने इसे चरितार्थ कर दिखाया है. 70 वर्षीय श्री चौधरी की शुरू से ही सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी थी. 50 वर्षों से वे लगातार सामाजिक कार्य कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों की […]

रानीगंज : लक्ष्य यदि निर्धारित हो तो व्यक्ति को सफलता अवश्य मिलती है. रानीगंज के वयोवृद्ध सफल उद्योगपति एवं समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने इसे चरितार्थ कर दिखाया है. 70 वर्षीय श्री चौधरी की शुरू से ही सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी थी. 50 वर्षों से वे लगातार सामाजिक कार्य कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों की वजह से ही श्री चौधरी यूथ आइकॉन के रूप में रानीगंज में विख्यात हो गये हैं. पांच कारखानों के मालिक राजेंद्र प्रसाद अपने व्यवहार, सामाजिक कार्य तथा मृदुभाषा के लिये शहर में जाने जाते हैं.
श्री चौधरी जब आठवीं में थे तभी से उन्होंने व्यापार में पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था. टीडीबी कॉलेज से वाणिज्य संकाय से स्नातक की परीक्षा उतीर्ण करने के बाद उन्होंने ट्रांसपोर्टिंग व्यवसाय शुरू किया और देखते ही देखते वे पांच कारखानों के मालिक बन गये. कारखानों की देखरेख फिलहाल उनके पुत्र रोहित और रवीन्द्र चौधरी के जिम्मे हैं. स्व. धनराज चौधरी के तीन पुत्रों में राजेंद्र प्रसाद चौधरी मझले पुत्र हैं. 1971 में धनबाद की मंजुलता से उनकी शादी हुयी थी.
राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने सर्वप्रथम बाबा अल्यूमिनियम कारखाना खोला था. इसके बाद बाबा इस्पात कारखाना, बाबा स्ट्रक्चरल लिमिटेड कारखाना, मानभूम इस्पात, प्रगति वायर्स नामक कारखाना चालू किया. उनके दोनों पुत्र रोहित तथा रवीन्द्र इसकी देखरेख करते हैं. उद्योग की बढोत्तरी में वे अपने पिता को आइकॉन मानते हैं. उनका कहना है कि उनकी कर्मनिष्ठा एवं कार्य के प्रति समर्पण ही उन्हें अनुप्रेरणा देती है. उनके ही प्रयास से लगभग 800 कर्मियों के परिवार का भरण-पोषण हो रहा है. श्री चौधरी वर्ष 1971 से 1973 तक रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव के पद पर रहे. 1973 में वे रानीगंज लायंस क्लब से जुड़े. वर्ष 1980 में लायंस क्लब के अध्यक्ष हुये.
वर्ष 2001 में लायंस क्लब के जिलापाल का पद सुशोभित किया. उन्होंने 12 वर्षों तक लायंस क्लब की ओर से संचालित रानीगंज नेत्र आई अस्पताल के सचिव एवं चेयरमैन के रूप में भी कार्य किया. वीरभूम, पुरूलिया, बर्दवान, अंडाल, दुर्गापुर, पानागढ, गुसकरा, जमालपुर, कालना तथा झारखंड के चिरकुंडा सह 15 लायंस अस्पताल बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. रानीगंज इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार के रूप में भी उन्होंने वर्षों कार्य किया है. श्री चौधरी रानीगंज सीताराम जी स्टेट तथा मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल से वर्षों से जुड़े हैं. वर्ष 1980 में मारवाड़ी सनातन विद्यालय में स्थानाभाव को देखते हुये उन्होंने शिक्षा विकास परिषद का गठन किया था.
शिक्षा विकास परिषद के तहत उन्होंने पांच बीघा जमीन भी ली थी. वर्तमान में निगम को यह जमीन उन्होंने विकास कार्यों के लिये प्रदान कर दी है. उन्होंने कहा कि रानीगंज में अगर कहीं हिंदी स्कूल का निर्माण होगा तो वे अपने स्तर से हर संभव मदद करेंगे. श्री चौधरी व्यवसाय तथा सामाजिक कार्यों के साथ-साथ खेलकूद में भी विशेष रूचि रखते हैं.
रानीगंज की खेलकूद संस्था स्पोर्ट्स एसेंबली के संस्थापक सदस्य के साथ-साथ आसनसोल राइफल क्लब से जुड़े हुये हैं. रानीगंज में धार्मिक कार्यों में श्री चौधरी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. राजेंद्र प्रसाद चौधरी की इन उपलब्धियों को देख कर उद्योग व्यापार में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाला युवा वर्ग अपना आइकॉन मानता है.

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