दुर्गापुर : दुर्गापुर के विभिन्न इलाकों में शनिवार को धूमधाम से रथयात्रा निकाली गयी. उत्सव पर जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये गये. इस्पात नगर के राजेंद्र प्रसाद एवेन्यू स्थित श्री जगन्नाथ देव मंदिर प्रांगण से प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम के साथ निकाली गई. हजारों भक्तों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. उद्घाटन दुर्गापुर इस्पात संयंत्र के सीईओ एके रथ ने विधिवत् नारियल फोड़कर किया. रथ पर प्रभु जगन्नाथ के अलावा बलराम तथा सुभद्रा विराजमान थे.
रथयात्रा राजेंद्र प्रसाद रोड होते हुये इंस्टीट्यूट से गुजरकर राजीव गांधी स्मारक मैदान में आयोजित रथ मेला तक गयी. भीड़ को संभालने के लिए पुलिस एवं निजी सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये थे. हर कोई प्रभु के रथ को खींचकर अपने को धन्य मान रहा था. रथ के आगे आगे विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के शिष्य प्रभु भक्ति में लीन होकर नृत्य करते हुए जय जगन्नाथ के नारे लगा रहे थे. रथ उत्सव के मौके पर राजीव गांधी स्मारक मैदान में 15 दिवसीय रथ मेला का आयोजन किया गया है.
इसके अलावा इस्पात नगर के रघुनाथपुर संलग्न इस्कॉन मंदिर से रथ यात्रा निकाली गई. उद्घाटन दुर्गापुर नगर निगम के चेयरमैन मृगेंद्र नाथ पाल ने किया. यह इस्पात नगर के विभिन्न इलाकों से होकर सिटी सेंटर चतुरंग मैदान में समाप्त हुयी. चतुरंग में सप्ताहव्यापी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा. इसके अलावा डीपीएल, मायाबाजार, विधाननगर, बेनाचिति के छोटे-छोटे मंदिरों में भी रथ यात्रा पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
अंडाल. उखड़ा में रथयात्रा धूमधाम से निकाली गयी. उखड़ा एवं आसपास के हजारों लोग रथयात्रा में शामिल हुये. रथतला से खींचकर उखड़ा स्कूल मोड़ तक तथा बाद में पुनः इसे रथतला खींचते हुये लाया गया. इस दौरान भीड़ को देखते हुये प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की थी. उल्लेखनीय है कि यहां 174 वर्षों से रथयात्रा निकल रही है. कुकड़ा के जमींदार शंभू लाल सिंह ने इसे शुरू किया था. पहले रथ छोटा था. बाद में इसे बड़ा रूप दिया गया. ट्रैक्टर के जरिये इसे खींचा जाता है.
रानीगंज. रानीगंज के सीआरसोल राजपरिवार की ऐतिहासिक रथ पूजा हजारों भक्तों के समागम बीच आरम्भ हुई. परंपरा के अनुसार भक्त नए राजभवन से पुराने राजभवन तक रथ को खींचकर ले गये. इस दौरान राज परिवार के सदस्य विट्ठल माल्या के अलावा मेयर परिषद सदस्य(स्वास्थ्य) दिव्येंदू भगत, बोरो चेयरपर्सन संगीता सारडा एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे. मौके पर भगवान जगन्नाथ के साथ ही दामोदरचंद्र की भी पूजा-अर्चना की गयी. उल्लेखनीय है कि वर्ष 1836 में राजपरिवार के गोविंद राम पंडित ने रथपूजा आरम्भ की थी. तब यह रथ लकड़ी का हुआ करता था.
आकस्मिक दुर्घटना से रथ जल गया था. वर्ष 1933 में गोविंद राम पंडित की पुत्री हरसुन्दरी देवी ने पीतल से रथ बनवाकर रथ पूजा शुरू की थी. रथ में रामायण तथा महाभारत के पात्रों को कलात्मक ढंग से उकेरा गया है. ऐतिहासिक रथ पूजा के मद्देनजर यहां सात दिवसीय रथ मेला लगता है. पहले दिन ही भारी संख्या में श्रद्धालु मेला पहुंचे. सियारसूल स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसिएशन के सदस्य मेला संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं. पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं.
मेला कमेटी के सदस्य निर्मल चटर्जी ने बताया कि मेले में 200 से अधिक स्टॉल लगाये गये हैं. दूसरी ओर, रानीगंज के केजी लेन से रथयात्रा निकाली गयी. भक्त इसे खींचकर एनएसबी रोड स्थित अमृत कुंज आश्रम के पास ले गये. रथ पूजा के दिन को शुभ मानते हुए कई दुकानों में पूजा-अर्चना कर नए खाता-बही की पूजा भी की गई.
