डिस्चार्ज होने की खबर मिलते ही वह फूट-फूट कर रोने लगी. नर्स को उसने कहा कि वो जा रही है लेकिन बच्ची को साथ लेकर नहीं जायेगी. नर्स ने उसे अकेले जाने से रोक दिया. खबर अस्पताल प्रबंधन सुदीप काड़ार को दी गयी. वह खुद मौके पर पहुंचे व गीता से बात की. अस्पताल प्रबंधन ने उससे जानने की कोशिश की आखिर क्या बात है, जो वह अपनी बेटी को साथ नहीं लेकर जाना चाहती है.
सब इसी बात का अंदाजा लगा रहे थे कि बेटी होने की वजह से वह ससुराल जाने से सहम रही है, लेकिन ऐसा नहीं था. काफी पूछताछ करने के बाद उसने बताया कि कुछ दिनों पहले ही पति हमेशा के लिए छोड़ कर चला गया है. पति के अलावा उसका कोई नहीं है. खुद की खाने की आफत आ गयी है, बच्ची का भरन पोषण नहीं कर पायेगी. अस्पताल प्रबंधन के लिए यह बिल्कुल अजीबोगरीब मामला था. अस्पताल अधीक्षक ने इस घटना की सूचना उलबेड़िया एसडीओ को दी. एसडीओ ने डीएम व जिला स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया. एक कमेटी गठित की गयी. पूरी सत्यता की जांच की गयी. जांच में गीता की सभी बातें सच पायी गयीं. अंतत कमेटी ने फैसला लिया कि बच्ची को होम भेज दिया जाये. गुरुवार को अस्पताल में एसडीओ व मां की मौजूदगी में बच्ची को होम के हवाले कर दिया. दृश्य इतना मार्मिक था कि सभी की आंखें छलक गयीं. बच्ची के चली जाने के बाद गीता भी चली गयी.
