कोलकाता: नेपाल में सत्ता परिवर्तन होते ही वहां की सरकार ने अब पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिल कर पर्यटन उद्योग का विकास करने की योजना बनायी है. इस संबंध में बातचीत करने के लिए नेपाल का एक प्रतिनिधिमंडल महानगर आयेगा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेगा.
जानकारी के अनुसार, नेपाल ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिल कर दोनों देशों के बीच इंटरनेशनल टूरिस्ट रोड तैयार करने की योजना बनायी है, जिससे बंगाल व नेपाल में पर्यटन का विकास किया जा सके. नेपाल के घेशा के मेची इलाके से चुनाव जीते रबिन कोइराला यहां आकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने यह प्रस्ताव रखेंगे. इसके साथ ही फरवरी में नेपाल में एशियन रूरल टूरिज्म फेस्टिवल का आयोजन किया जायेगा. इस उत्सव में हिस्सा लेने के लिए मुख्यमंत्री को भी आमंत्रण देंगे.
जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में सिलीगुड़ी से 40 किमी दूर नेपाल जाने के लिए पानीटंकी-काकुरभिटा का रास्ता अपनाया जाता है. इसके अलावा दाजिर्लिंग के पशुपति सीमांत क्षेत्र से नेपाल जाया जा सकता है. साथ ही फालुत से चियाभंजन के रास्ते भी बंगाल से लोग नेपाल जाते हैं. यह स्थान बंगाल, नेपाल व सिक्किम का संयोग स्थल भी है. अब नेपाल सरकार दोनों देशों को जोड़ने के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाना चाहती है, जिससे पर्यटकों को जल्द से जल्द बंगाल-नेपाल की दूरी को तय कराया जा सके.
गौरतलब है कि नेपाल व बंगाल के बीच हाथियों की समस्या भी बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि बंगाल से अगर कोई हाथी नेपाल में प्रवेश कर जाता है, तो उसे वहां मार दिया जाता है. दोनों देशों के बीच एलिफैंट कॉरिडोर जैसा बन गया है, जहां से हाथी वहां प्रवेश करते हैं. अब नेपाल सरकार भी इस पर सजग हो गयी है और वह इस समस्या का ठोस हल निकालना चाहती है.
इस संबंध में एसोसिएशन फॉर कंजरवेशन एंड टूरिज्म के संयोजक राज बसु ने बताया कि नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां की सरकार वहां के लोगों का समुचित विकास चाहती है और नेपाल में पर्यटन उद्योग का विकास होने से ही वहां की आर्थिक स्थिति में सुधार आयेगा.
