कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस से निलंबित राज्यसभा सांसद कुणाल घोष भले ही गिरफ्तार हो चुके हों, पर अपने रिकॉर्डेड बयान के जरिये उन्होंने सारधा घोटाले में राज्य सरकार, खासकर मुख्यमंत्री व तृणमूल महासचिव मुकुल राय पर गंभीर आरोप लगाये हैं. न्यूज चैनल 24 घंटा पर अपने रिकॉर्डेड बयान में कुणाल घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सारधा प्रमुख सुदीप्त सेन के कामकाज के संबंध में जानकारी थी.
केंद्र ने राज्य सरकार को किया था आगाह
उन्हें केंद्र सरकार की ओर से आगाह करते हुए पत्र भी दिया गया था. लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें (कुणाल घोष को) सुदीप्त सेन के पास काम करने से नहीं रोका. सारी जानकारी होने पर भी उन्हें आगाह नहीं किया गया.
अपने बयान में कुणाल ने कहा है कि सुदीप्त सेन से तृणमूल कांग्रेस ने भरपूर फायदा उठाया. लाभ लेने वालों में बड़े नेताओं से लेकर समूची पार्टी है. कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सांसद शुभेंदू अधिकारी ने कांथी में परियोजना के लिए सुदीप्त सेन से पैसे लिये थे. सुदीप्त ने बताया था कि शुभेंदू ने पहले ही तीन-साढ़े तीन करोड़ रुपये लिये हैं व वह और पैसे मांग रहे हैं. इसकी जानकारी उन्होंने (कुणाल) मुख्यमंत्री को दी तो मुख्यमंत्री ने सुदीप्त को और पैसे देने से मना किया.
लपेटे में कई नेता
परिवहन मंत्री मदन मित्र पर भी आरोपों के तीर छोड़ते हुए उनका कहना था कि मदन मित्र ने सुदीप्त सेन का गुणगान सारधा के कार्यक्रमों में किया है. वह खुद तो मीडियाकर्मी होने के कारण सारधा के साथ जुड़े लेकिन मदन मित्र क्यों जुड़े. वह क्यों सुदीप्त का गुणगान करते रहे. कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त सुरजीत कर पुरकायस्थ भी सारधा का गुणगान करने वालों में शामिल थे. पुरकायस्थ ने क्या खुद सुदीप्त की प्रशंसा की या किसी ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा? दक्षिण कोलकाता के संगोष्ठी क्लब की एक पूजा के लिए 18-20 लाख रुपये का विज्ञापन किसके कहने पर सुदीप्त सेन ने दिया. यह जांच का विषय है.
मीडिया इकाई शुरू करने का मकसद
रोज वैली के गौतम कुंडू के साथ सुदीप्त सेन ने बैठक कर कहा था कि उन्हें मीडिया का शौक है.
वह चाहते हैं कि देश भर में उनका मीडिया साम्राज्य रहे. एक बैठक में सुदीप्त ने कहा था कि ममता प्रधानमंत्री बनेंगी. ममता वहां मौजूद थीं. अंगरेजी, बांग्ला, हिंदी और उर्दू सहित कई भाषाओं में देश भर में अखबार प्रकाशित करने और चैनल शुरू करने की बात सुदीप्त ने कही. सारधा ने अपना समाचार पत्र, चैनल बनाया. दो हजार करोड़ रुपये के सारधा समूह का 10 फीसदी पैसा भी यदि मीडिया में लगा यानी 200 करोड़ रुपये भी खर्च हुए तो उसका समूचा लाभ तृणमूल कांग्रेस को ही दिया गया. कुणाल का कहना था कि तृणमूल को दो हजार करोड़ के सारधा समूह से फायदा हुआ.
कुणाल ने कहा कि तृणमूल महासचिव मुकुल राय के साथ सुदीप्त सेन की निजाम पैलेस में बैठक हुई. बैठक में रजत मजूमदार भी थे. मुकुल राय व पार्टी के आला नेतृत्व को सभी कुछ मालूम था.
मुकुल चाहते तो मामले की जांच में पूरा सहयोग कर सकते थे. कुणाल घोष ने कारोबारी आसिफ खान का भी नाम लिया है. उनका कहना था कि आसिफ खान भी जांच में सहायता कर सकते हैं. कुणाल का कहना था कि सारधा कांड में पुलिस की जांच में सहायता मुकुल राय, आसिफ खान, एस चक्रवर्ती, सोमेन बोस, तृणमूल सांसद सृंजय बोस, पूर्व सांसद टुटु बोस, सौमिक बोस, तृणमूल सांसद केडी सिंह, मतंग सिंह, परिवहन मंत्री मदन मित्र व रजत मजूमदार कर सकते हैं. उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि सुदीप्त सेन के अखबार आजाद हिंद व कलम अभी भी चल रहे हैं. इन्हें कौन फाइनेंस कर रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए. अतीत में कई अखबार बंद हुए लेकिन उन्हें तो खोलने की कोशिश नहीं की गयी. इन अखबारों को तृणमूल कांग्रेस या उनके करीबी मदद कर रहे हैं. वह वहां केवल नौकरी करने गये थे लेकिन उन्हें बलि का बकरा बनाया गया.
पूरा फायदा लेने वाले बच गये. कहा जा रहा है कि कुछ छिपाया नहीं जायेगा लेकिन जो छिप रहे हैं वही यह बात कह रहे हैं. सुदीप्त सेन ने सीबीआइ को लिखे अपने पत्र के जरिये नाटक किया था. यदि उनके आइटी विभाग में गड़बड़ी थी तो उन्होंने कदम क्यों नहीं उठाया. अपने संबोधन में कुणाल घोष यह बार-बार कहते दिखे कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे केवल इतना कह रहे हैं कि मामले की जांच में उपरोक्त व्यक्ति सहायता कर सकते हैं. माना जा रहा है कि यही सीडी उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को पहले ही सौंप दी है.
किसके बारे में कुणाल ने क्या कहा
तृणमूल महासचिव मुकुल राय के साथ सुदीप्त सेन की निजाम पैलेस में बैठक हुई. मुकुल व पार्टी के आला नेतृत्व को सभी कुछ मालूम था. मुकुल चाहते तो मामले की जांच में पूरा सहयोग कर सकते थे.
परिवहन मंत्री मदन मित्र ने सुदीप्त सेन का गुणगान सारधा के कार्यक्रमों में किया है. वह (कुणाल) तो मीडियाकर्मी होने के कारण सारधा के साथ जुड़े लेकिन मदन मित्र क्यों जुड़े. वह क्यों सुदीप्त का गुणगान करते रहे.
तृणमूल कांग्रेस सांसद शुभेंदू अधिकारी ने कांथी में परियोजना के लिए सुदीप्त सेन से पैसे लिये थे. सुदीप्त ने बताया था कि शुभेंदू ने पहले ही तीन-साढ़े तीन करोड़ रुपये लिये हैं व वह और पैसे मांग रहे हैं. इसकी जानकारी उन्होंने (कुणाल) मुख्यमंत्री को दी तो मुख्यमंत्री ने सुदीप्त को और पैसे देने से मना किया.
