मन्ना डे को समर्पित रहेगा बांग्ला गान उत्सव
सिलीगुड़ी : जो व्यक्ति अपनी भाषा को सम्मान नहीं देता, उसका पतन होना निश्चित है. लोक–संस्कृति, बंगाल की महान परंपरा से कटकर विकास करना मुश्किल है. आज की पीढ़ी रवींद्र संगीत, नजरूल संगीत, लोक गीत को नकार के रॉक और आरकेष्ट्रा की दिवानी है.लेकिन रवींद्र संगीत या नजरूल संगीत मात्र गीत नहीं, दर्शन है, हमारा साहित्य है. जीवन की कला है.
मनुष्य को मनुष्य बनाने का वह काम करती है. क्योंकि सूचना प्रौद्यौगिकी युग में हम मात्र एक मशीन बनकर रह गये है. यह कहना है बांग्ला गान उत्सव केमटी के अध्यक्ष डॉ मलय कांति करंजयी का. वह रविवार को कार्यक्रम के संबंध में पत्रकारों को संबोधित कर रहें थे. इस अवसर पर कमेटी के डॉ तापस कुमार चटर्जी, वार्ड दो के पार्षद मुकुल सेन गुप्ता सहित विभिन्न सदस्य उपस्थित थे.
अध्यक्ष डॉ मलय कांति करंजयी ने कहा कि इस वर्ष बांग्ला गान उत्सव 20 से 22 दिसंबर को प्रधान नगर स्थित मार्गेट स्कूल के सिस्टर निवेदिता ऑडिटेरियम में होगा. इसका ऑडिशन 14 व 15 दिसंबर को होगा. उत्सव का प्रथम दिन गायक मन्ना डे को समर्पित होगा. क वर्ग के लिए विषय है –रवींद्र संगीत, नजरूल गीति, आधुनिक गान व लोक गीति.
वहीं ख वर्ग के लिए द्विजेंर गीति, अतुल प्रसादी, रजनीकांतेर गान, सुकांत गीति, पुरातनी बांग्ला गान और शिशु वर्ग प्रतिभागी अपनी पसंद से गीत गा सकते है.
