कोलकाता: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था काफी लचर है. राज्य सरकार चाहते हुए भी यहां परिवहन सेवाओं का विस्तार नहीं कर पा रही है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात के साधनों की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने यहां अवैध रूप से चल रहे इंजन चालित वैन को वैध करने की योजना बनायी है.
राज्य सरकार ने आगामी लोकसभा चुनाव के पहले इसका फायदा उठाने के लिए इंजन चालित वैन को लाइसेंस देने की योजना बनायी है और इन रिक्शा वैन को लाइसेंस परिवहन विभाग द्वारा नहीं, बल्कि पंचायत द्वारा दिया जायेगा. ऐसी ही जानकारी राज्य के पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने दी.
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से इस संबंध में अनुमति देने के लिए परिवहन विभाग को पत्र लिखा था, जिसे परिवहन विभाग ने स्वीकार लिया है. अब इन इंजन चालित वैन रिक्शा को पंचायत विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किया जायेगा. पंचायत मंत्री ने संविधान के 243 एच धारा का उल्लेख करते हुए बताया कि इस धारा के अनुसार, अगर पंचायत चाहे तो वह विभिन्न लेवी, टोल व कर वसूल सकता है. उन्होंने बताया कि जिला परिषद के कार्यालय से इन रिक्शा वैनों को लाइसेंस दिया जायेगा.
इन पर रोक लगाने का दिया है निर्देश
गौरतलब है कि इन इंजन चालित रिक्शा वैन पर पाबंदी लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बहुत पहले ही निर्देश दे दिया था, लेकिन अब तक पर्षद के आदेशों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. वहीं, दूसरी ओर अब इसे वैध लाइसेंस देने की योजना बनायी जा रही है. हालांकि परिवहन विभाग इन वैन को लाइसेंस नहीं दे सकती है, इसलिए इसे लाइसेंस देने का जिम्मा पंचायत विभाग को सौंप दिया गया है. नियम के अनुसार, मोटर व्हीकल एक्ट केंद्र सरकार द्वारा तय किया गया है और अगर कोई भी राज्य सरकार किसी वाहन को लाइसेंस देती है तो उसमें वाहन के निर्माणकारी कंपनी का नाम की जानकारी देना अनिवार्य है. लेकिन इन इंजन चालित रिक्शा वैन का निर्माण कोई कंपनी नहीं, बल्कि स्थानीय मोटर मैकेनिक करते हैं.
