दिल तोड़ना आसान है, जोड़ना उतना ही कठिन : ममता

दाजिर्लिंग: दिल तोड़ना तो आसान है, लेकिन उसे जोड़ना उतना ही कठिन है. गुरुवार को स्थानीय चौरास्ता में हिल्स तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ये बातें कहीं. ममता बनर्जी ने कहा कि आपकी (पहाड़वासी) भाषा मुङो काफी पसंद है. लेकिन मैं बोल नहीं सकती हूं. […]

दाजिर्लिंग: दिल तोड़ना तो आसान है, लेकिन उसे जोड़ना उतना ही कठिन है. गुरुवार को स्थानीय चौरास्ता में हिल्स तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ये बातें कहीं.

ममता बनर्जी ने कहा कि आपकी (पहाड़वासी) भाषा मुङो काफी पसंद है. लेकिन मैं बोल नहीं सकती हूं. थोड़ा-थोड़ा समझ जरूर सकती हूं. उन्होंने साफ किया कि वह किसी के विरोध में नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैं पहाड़ की जनता की खुशी चाहती हूं. पहाड़ का विकास हो, यही मेरी चाहत है. बंगाल ने कभी आप लोगों को नहीं छोड़ा है, न ही आप लोग बंगाल को छोड़ सकते हैं. चाहे कोई बंगाली हो या राई, भुटिया हो, हम सब एक ही हैं. मैं किसी की दुश्मन नहीं हूं, मैं सभी की दोस्त हूं.’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल का सांस्कृतिक कार्यक्रम वह पहाड़ में करना चाहती हैं. उनका साफ कहना था कि वह पहाड़ में शांति चाहती हैं. लड़ाई-झगड़ा करने से किसी को कुछ नहीं मिलने वाला है. हम सबको मिल कर काम करना होगा. दाजिर्लिंग जब रोती है तो वह भी रोती हैं. कंचनजंगा जब हंसता है तो वह भी हंसती हैं. उन्होंने कहा कि बंद से यहां के लोगों को काफी नुकसान हुआ है.

वह चाहती हैं कि दाजिर्लिंग बंद मुक्त रहे. पहाड़ में हुए सरकारी कार्य का उल्लेख करते हुए उनका कहना था कि सरकार ने रोहिणी रोड बना दिया है. कालेबुड, मिरिक, कार्सियांग व दाजिर्लिंग में आइटीआइ बनेगा. जनसभा से मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों के काटे गये वेतन को फिर से भुगतान करने की घोषणा की. उन्होंने पहाड़ को बंद मुक्त करने की अपील की. मुख्यमंत्री ने जनवरी में फिर से पहाड़ का दौरा करने का वादा किया.

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