थम नहीं रहा शिशुओं की मौत का सिलसिला, 10 नवजातों की मौत

मालदा: मालदा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में बीते 36 घंटे में और 10 शिशुओं की मौत हो गयी है. मारे गये बच्चे नवजात थे. बच्चों के उम्र एक घंटे से एक दिन थी. रविवार शाम छह बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक 10 नवजातों की मौत ने फिर अस्पताल की चिकित्सा सेवा पर सवाल […]

मालदा: मालदा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में बीते 36 घंटे में और 10 शिशुओं की मौत हो गयी है. मारे गये बच्चे नवजात थे. बच्चों के उम्र एक घंटे से एक दिन थी.

रविवार शाम छह बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक 10 नवजातों की मौत ने फिर अस्पताल की चिकित्सा सेवा पर सवाल खड़े कर दिये हैं. हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चिकित्सकीय लापरवाही व उदसीनता के आरोप को बेबुनियाद करार दिया है.

रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन व मंत्री कृष्णोंदु चौधरी ने नवजातों की मौत की घटना को दुखद करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया गया है. बुनियादी संरचनाओं का विकास किया गया है. नवजातों को नाजुक हालत में बाहर से यहां लाया जा रहा है. मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इसमें उनकी कोई लापरवाही नहीं है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मारे गये 10 शिशुओं में एक झारखंड के राजमहल व एक दक्षिण दिनाजपुर जिले का है.

बाकी बच्चे मालदा के हैं. तीन शिशुओं की मौत शिशु विभाग में, चार शिशुओं की मौत न्यूनेटल विभाग व तीन शिशुओं की मौत एसएनसीयू विभाग में हुई. मृत शिशुओं के अभिभावकों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में हमेशा डॉक्टर नहीं मिलते हैं. भरती के काफी देर बार इलाज शुरू होता है. चिकित्सक अपनी सुविधा के अनुसार जांच करने आते हैं. कॉल बुक करने पर भी चिकित्सक नहीं मिलते हैं. उधर, कॉलेज के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दिलीप मंडल ने बताया कि चिकित्सकीय लापरवाही से बच्चों की मौत का आरोप गलत है. कम वजन, घर में प्रसव कराने, संक्रमण, सांस की तकलीफ आदि विभिन्न कारणों से नवजातों की मौत हुई है.

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