कोलकाता: राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली इकाइयों पर कोयला जुर्माने का बोझ बढ़कर 900 करोड़ रुपये हो गया है. उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल में 1993 से आवंटित 214 कोयला ब्लाकों का आवंटन रद्द करने और निकाले गये कोयले पर जुर्माना लगाने से इन इकाइयों पर जुर्माने का बोझ बढ़ता दिख रहा है.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल बिजली विकास निगम पर जुर्माने का बोझ करीब 800 करोड़ रुपये है. शेष अन्य दो इकाइयों पर है. राज्य के बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने इस मुद्दे पर कुछ कहने से इनकार कर दिया है.
पश्चिम बंगाल बिजली विकास निगम (डब्लूबीपीडीसीएल) प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी है, जो राज्य को बिजली की आपूर्ति करती है. ऐसे समय जबकि राज्य की बिजली इकाइयां वित्तीय रूप से बेहतर स्थिति में नहीं हैं और सरकार वित्तीय संकट का सामना कर रही है, यह बोझ काफी महंगा पड़ सकता है. आइसीआरए के उपाध्यक्ष गिरीश कदम ने कहा कि 2008 से मार्च 2014 तक निगम ने तीन कोयला ब्लॉकांे तारा पूर्व और पश्चिम तथा बारजोरा से 2.4 करोड़ टन कोयला निकाला है.
महानगर व हावड़ा को बिजली की आपूर्ति करने वाली सीईएससी पर जुर्माने का बोझ 700 करोड़ रुपये पड़ेगा. उच्चतम न्यायालय ने परिचालन वाली खुद के इस्तेमाल की कोयला खानांे से कुल निकाले गये कोयले पर 295 रुपये प्रति टन का भुगतान करने का निर्देश दिया है. इक्रा का अनुमान है कि इससे पूरे बिजली क्षेत्र पर करीब 6000 करोड़ रुपये के जुर्माने का बोझ पड़ेगा.
