कोलकाता: महानगर में रविवार को एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद मीनाक्षी लेखी ने राज्य सरकार व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन को आड़े हाथों लिया. प्रभात खबर को दिये विशेष साक्षातकार में उन्होंने कहा कि बंगाल और देश की जनता को ममता बनर्जी से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन श्रीमति बनर्जी उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतरी.
प्रश्न : राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन को आप किस रूप में देखती हैं ?
ममता बनर्जी की शुरुआत व उनके संघर्ष के दिनों में मैं उनसे काफी प्रभावित थी. आंदोलन करने की बात हो या अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना. ये मुङो प्रभावित करते थे, लेकिन मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि श्रीमति बनर्जी इतना बदल जायेंगी. उनके आज के चेहरे और शासन के विषय में मैंने कभी सोचा नहीं था. किसी भी सरकार या मुख्यमंत्री को संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ काम करना पड़ता है, लेकिन बंगाल की सरकार और मुख्यमंत्री में यह बातें नहीं दिख रहीं. यहां की सरकार के काम से यहां की जनता को नहीं बल्कि सरकार के मंत्रियों और उनके अपने लोगों को लाभ हो रहा है. वाममोरचा शासनकाल में यहां की जनता उदासीनता और शोषण की शिकार रहीं, और आज तृणमूल के शासन में भी एक ही हाल है. आज वाममोरचा के गुंडे तृणमूल में शामिल हो गये हैं. बंगाल में पहले यहां के क्लबों का रंग लाल था. आज क्लब वहीं हैं, रंग सफेद और नीला हो गये हैं और क्लबों के आगे जोड़ाफूल खिल गये हैं. मुख्यमंत्री जनता के हितों का नहीं, बल्कि अपना और अपने मंत्रिमंडल के लोगों के हितों को ध्यान में रख कर शासन कर रही हैं.
प्रश्न : आज के बंगाल के नेताओं को आप किस रूप में देखती हैं ?
बंगाल की जनता पिछले चार दशक से सरकारी उदासीनता और शोषण की शिकार रही है. बंगाल में एक से बढ़ एक भारत मां के सपूत और विद्वानों ने जन्म लिया है. रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर जैसे विद्वान यहां जन्म लिये हैं. सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे नेता इस भूमि पर जन्म लिये थे. लेकिन आज के दौर में बंगाल का नेतृत्व देख कर आश्चर्य लगता है. एक समय जहां का नेतृत्व और नेता देश का नेतृत्व करते थे, आज वहीं की जनता अब एक रास्ते की तलाश में हैं.
प्रश्न : क्या भाजपा बंगाल की जनता का भरोसा जीत पायेगी?
बंगाल की जनता को भाजपा से उम्मीद दिख रही है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर यहां की जनता को विश्वास हो रहा है, क्योंकि भाजपा किसी परिवार की पार्टी नहीं, जनता की पार्टी है. भाजपा के नेताओं ने काफी संघर्ष किया है. यही कारण है कि 15 साल बाद अब बंगाल के विधानसभा में भाजपा का एक विधायक अकेला बंगाल की जनता का आवाज बन कर गरजेगा. बंगाल की जनता आज यहां के ही सरकार के उत्पीड़न की शिकार है. जनता तकलीफ में है.
प्रश्न : मिशन 2016 कितना सफल रहेगा ?
बंगाल में भाजपा के लिए मिशन 2016 चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. संघर्ष की आवश्यकता है. बंगाल में हमेशा से माकपा व तृणमूल कांग्रेस संकीर्ण मानसिकता वाली विभाजन की राजनीति करती आयी हैं. बंगाल में गुड गर्वनेंस का अभाव है. चुनाव में सिर्फ जीतने के लिए खड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि चुनाव जीतने के बाद जनता की सेवा की भावना लोगों में होने की आवश्यकता है. महिला सुरक्षा और विकास के मामले में बंगाल आज यूपी से भी पीछे चला गया है. एक समय बंदे मातरम का नारा लगा कर आजादी दिलानेवाले बंगाल में आज खुलेआम कत्लेआम हो रहा है. बंगाल का अतीत काफी स्वर्णिम रहा है, लेकिन आज वर्तमान में बंगाल में सारधा कांड में जहां बंगाल की 17 लाख जनता को लूटा गया, वहीं यादवपुर विश्वविद्यालय में सरकार के सह पर छात्रों पर पुलिस और सरकारी सह प्राप्त गुंडे हमला कर रहे हैं. अगर सारधा कांड में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं जुड़ी हुई हैं, तो फिर सीबीआई के सामने जाकर अपना स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रहीं. मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखना चाहिए. इस परिस्थिति में 2016 में भाजपा बंगाल के सबसे बड़े राजनीतिक दल रूप में सामने आयेगी, क्योंकि आज बंगाल की जनता भाजपा के सिवा किसी पर विश्वास नहीं कर पा रही है.
