13 सितंबर को दो विधानसभा सीटों पर होनेवाले उपचुनाव में महानगर के मध्य स्थित चौरंगी विधानसभा सीट को लेकर जितनी गहमागहमी है, उतनी पिछले विधानसभा चुनाव 2011 व लोकसभा चुनाव 2014 में भी देखने को नहीं मिली.
लोकसभा चुनाव के बाद जिस प्रकार से बंगाल की राजनीतिक परिस्थिति में परिवर्तन आया है, ऐसे में यहां की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह सीट बचाना प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गयी है.
कोलकाता: चौरंगी विधानसभा सीट के लिए शनिवार को उपचुनाव होगा. यहां तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस और माकपा के प्रत्याशियों में चहुमुखी लड़ाई का आकलन किया जा रहा है. सभी पार्टियों ने चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. यहां 2011 में कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस दोनों ने आपसी गंठबंधन के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा था और तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार शिखा मित्र ने जीत हासिल की थी, लेकिन अभी परिस्थिति बदल गयी है, क्योंकि कुछ महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में अगर वोट का आंकड़ा देखा जाये तो इस क्षेत्र में कांग्रेस को सबसे अधिक वोट मिले थे. तृणमूल कांग्रेस दूसरे नंबर पर और भाजपा तीसरे नंबर पर थी. शनिवार को इस सीट पर उपचुनाव होगा और इसके लिए गुरुवार को चुनाव प्रचार का दौर थम गया. सभी पार्टियों ने चुनाव प्रचार बंद कर दिया है और यहां पर कुल 15 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया है, जो अपने-अपने क्षेत्र में रूट मार्च कर रहे हैं.
