कोलकाता: सारधा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस से निलंबित सांसद कुणाल घोष ने एक खुला पत्र लिख कर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है.
उन्होंने पत्र में तृणमूल कांग्रेस से पार्टी स्तर पर जांच आयोग गठित करने की मांग की है. घोष ने कहा है कि 72 घंटे के अंदर जांच आयोग गठित किया जाये.
इस अवधि में वह कोई बयान नहीं देंगे. लेकिन समय सीमा बीतने के बाद वह (कुणाल) सारधा कांड से जुड़े बड़े तृणमूल नेताओं के नाम का खुलासा करेंगे. घोष के पत्र ने तृणमूल कांग्रेस के अंदर बेचैनी पैदा कर दी है. पत्र में कुणाल ने कहा है कि इस आयोग में उन्हीं लोगों को रखा जाये जिनकी छवि साफ हो. घोष ने यह पत्र छह सितंबर को बैंकशाल कोर्ट में अपनी पेशी के दौरान लिखा था. लेकिन जिस तरह से प्रशासन की ओर से उन्हें मीडिया में बयानबाजी से मना किया जा रहा है, इसके जवाब में उन्होंने यह पत्र जारी किया है.
रजत मजूमदार को न्यायिक हिरासत
उधर, सीने में दर्द की शिकायत के बाद पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार का एनआरएस मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है. सीबीआइ ने सारधा मामले में पूछताछ के बाद मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद वह अस्वस्थ हो गये. बुधवार को सीबीआइ अलीपुर कोर्ट में उन्हें पेश नहीं कर पायी. जांच एजेंसी ने उनकी सात दिन की रिमांड मांगी, लेकिन अदालत ने रजत की अस्वस्थता को देखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश दिया. अस्वस्थ रहते उनसे पूछताछ नहीं की जा सकती. इधर, अस्पताल में आठ डॉक्टरों की टीम उनकी देखभाल कर रही है. सीबीआइ ने अदालत को बताया कि मुंबई व दिल्ली में व्यवसायी संधीर अग्रवाल व इस्ट बंगाल क्लब के अधिकारी देबब्रत सरकार के आवास की तलाशी में महत्वपूर्ण कागजात मिले हैं. दोनों सुदीप्त सेन के साथ साजिश में शामिल थे. देबब्रत और संधीर को बुधवार को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया. अदालत ने दोनों को 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
तृणमूल सांसद सृंजय बोस से सात घंटे तक पूछताछ
सीबीआइ की विशेष अपराध शाखा ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद सृंजय बोस से पूछताछ की. सीबीआइ सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा सदस्य बोस को कल समन भेजा गया था. बांग्ला दैनिक ‘प्रतिदिन’ के मालिक बोस ने कभी राज्यसभा सदस्य कुणाल घोष को संपादक के तौर पर अखबार में नियुक्त किया था. सारधा मामले में अपनी कथित भूमिका के कारण घोष अभी जेल में हैं. पूछताछ के दौरान सीबीआइ को जानकारी मिली कि सुदीप्त सेन प्रतिदिन अखबार के कार्यालय में जाया करते थे तथा दोनों के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होती थी. सृंजय से कुणाल के सामने कर पूछताछ की गयी.
कुणाल घोष के पत्र में क्या है खास
सारधा मामले की सीबीआइ जांच में हर संभव सहयोग कर रहा हूं.
तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी को चिटफंड मामले में 72 घंटे के अंदर पार्टी का जांच आयोग गठित करने को कहा है.
72 घंटे तक मैं (कुणाल) कोई बयान नहीं दूंगा.
त्न तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं व समर्थकों से कहना चाहता हूं कि खुद को बचाने के लिए कुछ नेता आप लोगों को ढाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. खुद विचार कर जांच पर नजर रखें.
मैं जो कह रहा हूं, उसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है. जांच के लिए जो जरूरी है, वह बोल रहा हूं. मेरी बातें मीडिया में प्रसारित हो रही है. वह प्रचार के लिए नहीं है. जांच के लिए हर तरह से तैयार हूं.
अमेरिका के ला वेगास के कार्यक्रम में मैं नहीं गया था.
वित्त मंत्री अमित मित्र की उपस्थिति में बैंकाक के किसी भी कार्यक्रम में नहीं था.
तृणमूल यदि 100 फीसदी सही है, तो बयानबाजी के बदले 72 घंटे के अंदर पार्टी स्तर पर जांच आयोग का गठन करे. उसमें मुङो अपनी बात रखने का अवसर दे. जो चिटफंड से जु़ड़े नहीं हैं, सुविधाएं नहीं ली हैं, उनके लिए जांच आयोग निष्पक्ष रूप से काम करे.
भाजपा का सवाल- घोटाले पर चुप क्यों हैं ममता
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा के नेतृत्व में बुधवार को पार्टी नेताओं ने राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात कर सारधा मामले में श्वेत पत्र जारी करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की. सिन्हा ने कहा कि तृणमूल के कई नेताओं व मंत्रियों के नाम सारधा मामले में आ रहे हैं. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस संबंध में कुछ नहीं कह रही हैं. राज्यपाल को दिये गये ज्ञापन में हमने इस मामले में जिन नेताओं के नाम आये हैं, उनसे इस्तीफे की मांग की है.
सीबीआइ के खिलाफ आज सड़क पर उतरेगी तृणमूल
सारधा चिटफंड मामले में तृणमूल कांग्रेस ने अब सीबीआइ के खिलाफ ही मुहिम छेड़ दी है. तृणमूल महिला कांग्रेस की ओर से गुरुवार को सीबीआइ कार्यालय के समक्ष सुबह 11 बजे विरोध प्रदर्शन किया जायेगा. तृणमूल कांग्रेस ने सीबीआइ जांच को राजनीतिक से प्रेरित बताया है. बुधवार को कोलकाता के पूर्व मेयर व राज्य के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने सीबीआइ जांच को साजिश करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपने हित के लिए सीबीआइ का इस्तेमाल कर रही है.
साफ-सुथरी नहीं है तृणमूल : आसिफ खान
दो बार सीबीआइ जांच का सामना कर चुके तृणमूल कांग्रेस नेता और बांग्ला अखबार ‘आजकेर कलम’ के संपादक आसिफ खान ने बुधवार को पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया. उन्होंने पार्क सर्कस स्थित अपने निवास स्थान पर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तृणमूल को साफ-सुथरी पार्टी समझ-कर इसमें शामिल हुए थे. लेकिन अब यह साफ-सुथरी (क्लीन) पार्टी नहीं है. उन्होंने 2009 में इस पार्टी का दामन थामा था. खान ने तहफूज-ए-इसलाम नाम से नयी पार्टी बनाने की घोषणा की.
