सारधा चिटफंड घोटाला: मदन मित्र के पूर्व सहायक से पूछताछ

नयी दिल्ली/कोलकाता. सीबीआइ ने सारधा चिटफंड घोटाले की जांच तेज कर दी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, असम और मुंबई में ताबड़तोड़ छापे मारे. कोलकाता में राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्र के पूर्व निजी सहायक बापी करीम, इस्ट बंगाल क्लब के पूर्व अधिकारी पलटू दास, उद्योगपति सज्जन अग्रवाल व संधीर […]

नयी दिल्ली/कोलकाता. सीबीआइ ने सारधा चिटफंड घोटाले की जांच तेज कर दी है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, असम और मुंबई में ताबड़तोड़ छापे मारे.

कोलकाता में राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्र के पूर्व निजी सहायक बापी करीम, इस्ट बंगाल क्लब के पूर्व अधिकारी पलटू दास, उद्योगपति सज्जन अग्रवाल व संधीर अग्रवाल, पूर्व आइपीएस अधिकारी देबेन विश्वास, व्यवसायी राजेश सराफ और तृणमूल कांग्रेस के करीबी बांग्ला अखबार के संपादक आसिफ खान के परिसरों की तलाशी ली गयी. सीबीआइ ने करीम से लंबी पूछताछ भी की. अधिकारियों ने उनके बैंक अकाउंट और पासबुक जब्त कर लिये हैं. उधर, सीबीआइ ने असम के दो पूर्व मंत्रियों हिमांता बिस्व शर्मा और अंजन दत्ता के घरों व कार्यालयों की तलाशी ली. गुरुवार को सीबीआइ की टीमों ने 22 स्थानों पर छापेमारी की.

सूत्रों के अनुसार, सीबीआइ अधिकारी गुरुवार की सुबह ही व्यवसायी संधीर अग्रवाल के एजेसी बोस रोड स्थित कार्यालय और संधीर के पिता सज्जन अग्रवाल के कार्यालय पहुंचे. वहां काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया गया. उधर, तृणमूल कांग्रेस के घनिष्ठ व एक बांग्ला अखबार के संपादक आसिफ खान के पार्क सर्कस स्थित मकान पर भी छापेमारी की गयी. व्यवसायी राजेश सराफ के हावड़ा के नरसिंह बोस रोड स्थित आवास पर सीबीआइ अधिकारी पहुंचे. इस दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं थे. घर पर ताला लगा था. इसके बाद सीबीआइ टीम ने उनके कार्यालय पर छापेमारी की. बताया जा रहा है कि वह (राजेश सराफ) संधीर का परिचित हैं. गौरतलब है कि संधीर फिलहाल सीबीआइ के हिरासत में हैं. सारधा मामले में उसे गिरफ्तार किया गया है.

उधर, पूर्व आइपीएस अधिकारी तथा तृणमूल कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले रजत मजूमदार और पूर्व पुलिस अधिकारी देबेन विश्वास के घर पर भी सीबीआइ अधिकारियों ने छापेमारी की. परिवहन क्षेत्र से जुड़े दो व्यवसायियों के मदन मोहन स्ट्रीट स्थित आवासों पर भी छापेमारी की गयी. हालांकि वहां अधिकारियों के हाथ कुछ भी नहीं लगने की बात सामने आयी है.

असम में 14 जगह छापे
सीबीआइ सूत्रों ने कहा कि गुवाहाटी में 12 स्थानों, असम के ही धुबरी में दो स्थानों, कोलकाता में 7 स्थानों और मुंबई में एक स्थान पर छापे मारे गये. जांच एजेंसी ने श्री शर्मा और श्री दत्ता के अलावा असम के पूर्व डीजीपी शंकर बरुआ और गायक सदानंद गोगोई के परिसरों पर भी छापे मारे. श्री शर्मा 2001 से तरुण गोगोई के मंत्रिमंडल में ताकतवर मंत्री रहे, लेकिन गोगोई को हराने के लिए एक अभियान चलाने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गयी. श्री दत्ता को गोगोई का खासमखास माना जाता है और वह परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रलय संभाल चुके हैं. सारधा समूह के खिलाफ चार एफआइआर दर्ज किये गये हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी के अधिकारियों व उससे जुड़े लोगों द्वारा हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गयी. इसके अलावा, ओड़िशा में पोंजी कंपनियों के खिलाफ 44 एफआइआर दर्ज हैं.

शांतनु घोष से पूछताछ
सारधा कांड की जांच के तहत एक बार फिर जेनाइटिस के प्रमुख शांतनु घोष से पूछताछ की गयी. जानकारी के मुताबिक, दिन में 12 बजे शांतनु घोष सॉल्टलेक के सीजी कॉम्पलेक्स स्थित सीबीआइ कार्यालय पहुंचे. सूत्रों के अनुसार 2010 में शांतनु के बांग्ला चैनल को सुदीप्त ने खरीदा था. साथ ही ग्लोबल ऑटोमोबाइल बाइक कारखाना भी शांतनु से सुदीप्त द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आयी है. उक्त कारखाने के नाम से सात बैंकों से करीब 189 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था. सुदीप्त के बयान में इस ऋण का उल्लेख भी किया गया था, जिसमें इस ऋण की बड़ी राशि उसके द्वारा चुकाये जाने की बात कही गयी थी.

इस्ट बंगाल क्लब के पूर्व अधिकारी के आवास की ली गयी तलाशी
कोलकाता. सारधा चिटफंड मामले की जांच के तहत सीबीआइ ने छापेमारी तेज कर दी है. देबब्रत सरकार के बाद अब सीबीआइ जांच में इस्ट बंगाल क्लब के एक पूर्व अधिकारी का नाम सामने आया है. सूत्रों के अनुसार इस्ट बंगाल क्लब के दिवंगत अधिकारी पल्टू दास के आवास पर सीबीआइ अधिकारियों ने छापेमारी की. महानगर के अम्हस्र्ट स्ट्रीट स्थित आवास में सीबीआइ अधिकारियों की एक टीम सुबह करीब नौ बजे वहां पहुंची. सीबीआइ अधिकारियों की टोली में एक महिला अधिकारी भी शामिल थीं. छापेमारी के दौरान पल्टू दास के परिजनों से भी पूछताछ की गयी. बताया जा रहा है कि पल्टू दास के जरिये ही देबब्रत सारधा समूह का प्रमुख सुदीप्त सेन तक पहुंचा था.

सारधा घोटाले की सीबीआइ जांच की निष्पक्षता पर सीएम को संदेह
कोलकाता: सारधा चिटफंड घोटाले में परिवहन मंत्री मदन मित्र के एक करीबी के घर की सीबीआइ की तलाशी के दौरान ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच की निष्पक्षता पर उंगली उठा दी. तृणमूल छात्र परिषद की सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी असली अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है. विपक्षी दलों पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चिटफंड कंपनियों का उदय उस वक्त हुआ, जब तृणमूल सत्ता में नहीं थी. राज्य की सत्ता में आने के बाद हमें इस घोटाले का पता चला. हमारी सरकार ने घोटाले के सरगना को गिरफ्तार कर सरकारी खजाने से लोगों के पैसे वापस करने की प्रक्रिया तक शुरू कर दी है. सीबीआइ की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म कलाकार अपर्णा सेन से केवल इसलिए पूछताछ की जा रही है, क्योंकि उन्होंने सारधा समूह की एक पत्रिका का संपादन किया था. पर इसमें उनकी क्या गलती है. सारधा समूह के मीडिया कारोबार में काम करने वाले पत्रकारों से पूछताछ को गलत बताते हुए सुश्री बनर्जी ने कहा कि चैनल बंद हो रहे हैं. कर्मचारी भूखे मर रहे हैं. असली अपराधियों को बचाया जा रहा है और राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कई तरह की झूठी बातें फैलायी जा रही हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सारधा घोटाले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाती है तो इसमें सहयोग किया जायेगा.

बापी करीम के बयानों में विरोधाभास
परिवहन मंत्री मदन मित्र के पूर्व निजी सहायक बापी करीम से सीबाआइ के तीन अधिकारियों की टीम ने उनके आवास पर लगभग चार घंटे तक पूछताछ की, लेकिन पूछताछ के दौरान उनके बयान में विरोधाभास पाया गया. इससे असंतुष्ट सीबीआइ अधिकारी उन्हें सीबीआइ कार्यालय में पूछताछ के लिए ले गये. सीबाआइ अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान जानकारी मिली है कि करीम सप्ताह में एक दिन मिडलैंड पार्क स्थित सुदीप्त सेन के दफ्तर जाते थे और वह प्राय: शाम को आठ व नौ बजे के बाद वहां जाते थे. सीबीआइ अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि करीम के तार किस तरह से सुदीप्त सेन से जुड़े हुए हैं तथा प्रभावशाली लोगों की क्या भूमिका थी.

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