घर छोड़ने को मजबूर हैं वामपंथी

कोलकाता: राजनीतिक हिंसा के खिलाफ वाममोरचा कोलकाता जिला कमेटी का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा. इस कार्यसूची के तहत वाममोरचा की ओर से महानगर में लाल बाजार अभियान चलाया गया. जानकारी के मुताबिक शाम करीब छह बजे धर्मतल्ला के वाइ चैनल के निकट स्थित धरना स्थल से विरोध रैली लाल बाजार स्थित कोलकाता […]

कोलकाता: राजनीतिक हिंसा के खिलाफ वाममोरचा कोलकाता जिला कमेटी का धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा. इस कार्यसूची के तहत वाममोरचा की ओर से महानगर में लाल बाजार अभियान चलाया गया.

जानकारी के मुताबिक शाम करीब छह बजे धर्मतल्ला के वाइ चैनल के निकट स्थित धरना स्थल से विरोध रैली लाल बाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय की ओर रवाना हुई.

रैली का नेतृत्व राज्य में वाममोरचा के चेयरमैन विमान बसु ने किया जबकि इस मौके पर सांसद मोहम्मद सलीम, फैयाज अहमद खान, वाममोरचा कोलकाता जिला कमेटी के संयोजक दिलीप सेन, आरएसपी के नेता मनोज भट्टाचार्य, भाकपा नेता देवाशीष दत्त, बड़ाबाजार युवा लीग के नेता मनोज कुमार गुप्ता, युवा लीग के नेता श्रीकांत सोनकर समेत अन्य नेता व कार्यकर्ता शामिल रहे. बेंटिक स्ट्रीट के निकट पुलिस ने रैली को आगे जाने से रोक दिया. जिसके बाद वहां थोड़ी देर के लिए पथ सभा हुई. इस मौके पर आला वामपंथी नेता विमान बसु ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक हिंसा के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं. आरोप के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही वामपंथी नेताओं व कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं.

वामपंथी कार्यकर्ता अपने घर को छोड़ने को मजबूर हैं. इस बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर ठोस कदम उठाने की मांग की गयी लेकिन इसका फायदा नहीं हो पाया. इसके खिलाफ वाममोरचा राज्य कमेटी ने व्यापक आंदोलन का आह्वान किया है. जिलों-जिलों में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं और यह आंदोलन जारी रहेंगे. विमान बसु का कहना है कि वामपंथ की बातें कहने से ही कोई वामपंथी नहीं हो जाता है. वामपंथ विचारधारा संबंधी कार्यो को करने से ही असली वामपंथी बना जा सकता है. आरोप के मुताबिक तृणमूल सरकार की नीति जनविरोधी है. जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. इधर वामपंथी नेता दिलीप सेन ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि महानगर में माकपा समेत वाममोरचा के अन्य घटक दलों के दर्जनों कार्यालयों में तोड़फोड़ व उन पर जबरन कब्जा किया गया है लेकिन इसके विरुद्ध प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. राजनीतिक हिंसा की घटनाओं के विरुद्ध वामपंथियों का विरोध लगातार जारी रहेगा.

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