जलपाईगुड़ी : वाइरल फीवर से पीड़ित 100 प्रतिशत मरीजों में 20 से 30 प्रतिशत के खून में जापानी इंसेफलाइटिस वाइरस मिल रहे है. बाकी 60-70 प्रतिशत मरीजों में जलवाही इंसेफलाइटिस यानी एंट्रो वाइरस मिल रहे है.
जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार जिले में इंसेफलाइटिस पीड़ितों की उम्र 35 साल से उपर है. यहां बच्चों में इंसेफलाइटिस वाइरस नहीं देखा जा रहा है. विगत दो सालों में इन दो जिलों में 15 साल तक के बच्चों को इंसेफलाइटिस का टीका लगा था.इसी कारण इस साल बच्चे इंसेफलाइटिस के चपेट में नहीं आये हैं.
ये बातें जिला उप मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पूरण शर्मा ने कहीं. वह आज जलपाईगुड़ी जिला सर्वशिक्षा मिशन की ओर से उच्च विद्यालयों के शिक्षकों को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ शर्मा ने कहा कि जनबहूल इलाके से सूअरों को दूर रखने से इंसेफलाइटिस का प्रकोप कम हो जायेगा. जिले के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण व्याप्त है.
लोग शुद्ध पेयजल नहीं पी रहे हैं. प्रदूषित पानी के कारण जलवाही इंसेफलाइटिस से पीड़ित हो रहे हैं. पानी की समस्या पीएचई व सूअरों की समस्या प्राणीसंपदा विकास विभाग को देखना चाहिए. नगर निगम कानून के अनुसार नगर निगम इलाकों में सूअर पालन पर रोक लगाये जाने के बावजूद जिला अस्पताल व शहर के जहां-तहां सूअरों का खटाल देखा जा रहा है.
कार्यशाला में सर्वशिक्षा मिशन की ओर से शिक्षक सुकल्याण भट्टाचार्य व डॉ पार्थ प्रतीम पाल ने इंसेफलाइटिस पर एक वृतचित्र प्रदर्शित किया. सर्व शिक्षा मिशन के जिला सहायक परियोजना अधिकारी सुकुमार पसारी ने बताया कि कार्यशाला में आये शिक्षक अपने-अपने स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को इंसेफलाइटिस के बारे में जागरूक करेंगे.
