कोलकाता: परिवहन विभाग को घाटे से उबारने और लोगों को ज्यादा से ज्यादा जगहों पर सरकारी बसों की सुविधा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी परिवहन निगमों का आपस में विलय करने का फैसला किया गया है.
इस मुद्दे पर निगमों की महत्वपूर्ण बैठक के बाद फैसला लिया गया है कि सीटीसी, सीएसटीसी व डब्ल्यूबीएसटीसी संयुक्त रूप से कार्य करेंगे. यानी बैठक में निर्धारित रूटों पर बिना प्रतिद्वंद्विता के एक ही परिवहन निगम की बसें चलायी जायेंगी. यह 16 अगस्त से कार्यकारी होगा. इस बात की जानकारी राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्र ने दी. उन्होंने कहा कि एक ही रूटों पर तीनों परिवहन निगमों की बसें चलती हैं. लेकिन कई ऐसे रूट भी हैं, जहां लोगों को सरकारी बसों के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. परिवहन निगमों द्वारा आपसी सहमति से रूटों को बांट लेने से लोगों की उक्त समस्या से निबटा जा सकता है. उदाहरण के लिए सियालदह से सांकराइल रूट में सीएसटीसी की जगह सीटीसी की बसें चलायी जायेंगी, जबकि टालीगंज से नदिया की रूट पर सीटीसी की बजाय सीएसटीसी की बसें चलायी जायेंगी. समन्वय के अभाव के कारण प्रति वर्ष राज्य सरकार को करीब 600 करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है. श्री मित्र ने बताया कि यही वजह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी परिवहन निगम के कर्मचारियों को एक छतरी के नीचे लाने की पहल की है.
नये प्लान के तहत अनायास खर्चो पर अंकुश लगाकर आमदनी बढ़ाना है. आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा भी देना है. परिवहन मंत्री ने कहा कि परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने के लिए करीब 800 बसें उतारी जायेंगी. एसी व नन-एसी को मिलाकर बसों की संख्या करीब 874 होगी. इसके लिए लगभग 490 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे, जिसमें से 315 करोड़ राज्य सरकार द्वारा खर्च किये जायेंगे. इसके साथ ही राज्य सरकार टैक्सी रिफ्यूजल की घटनाओं को पूरी तरह से अंकुश लगाने पर काम कर रही है. राज्यभर में काफी तादाद में नो-रिफ्यूजल टैक्सी भी उतारने की योजना है.
