कोलकाता : भाजपा ने दो सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में भले ही राजनीतिक तौर पर अपनी जगह बनाने में कामयाबी हासिल की हो पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी को राज्य में कोई बडी सफलता हाथ नहीं आने दी. ममता को मुसलमानों के 28 प्रतिशत वोट शेयर से फायदा मिला जिससे तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 34 सीटों पर जीत हासिल की.
तृणमूल कांग्रेस को 39.4 फीसदी वोट मिले जबकि कांग्रेस को चार सीटों और नौ फीसदी वोट से संतोष करना पडा. वाम दलों ने आजादी के बाद अपना अब तक का सबसे बदतर प्रदर्शन किया और 23 फीसदी वोट एवं दो सीटें ही जीत सके. चुनाव परिणाम आने तक बंगाल की राजनीति में अप्रासंगिक समझी जा रही भाजपा को 17.06 फीसदी वोट मिले और उसे दो सीटें भी हासिल हुईं. साल 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद राज्य में भाजपा के वोट प्रतिशत में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है. बंगाल में सत्ता की राह समङो जाने वाले 28 फीसदी मुस्लिम वोट शेयर से ममता को फायदा मिला.
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान ममता और मोदी के बीच छिडी जुबानी जंग से कांग्रेस, माकपा, तृणमूल और भाजपा का चौतरफा मुकाबला मोदी और ममता के बीच दोतरफा जंग में तब्दील हो गया. इससे ममता को दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों में मुस्लिमों के वोट हासिल करने में मदद मिली. राजनीतिक विश्लेषक उदयन बंद्योपाध्याय के मुताबिक, ‘‘पूरा चुनाव मोदी के समर्थन या मोदी के विरोध पर केंद्रित हो गया. अल्पसंख्यकों सहित बंगाल में जितने मोदी विरोधी थे उन्होंने ममता का पूरा समर्थन किया और ममता के विरोधियों ने इस बार भाजपा को वोट किया.’’
