मालदा: केंद्र की यूपीए-2 सरकार में शामिल गंठबंधन दलों के नेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद एवं बढ़ती महंगाई के कारण लोकसभा चुनाव में पूरे देश में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई है.
देश में लोगों ने क्षेत्रीय पार्टियों को नकार दिया है. मालदा के कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेस नेता तथा मालदा दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव जीते कांग्रेस सांसद अबु हासेम खानचौधरी ने यह बात कही. उनके साथ उत्तर मालदा केंद्र की कांग्रेस सांसद तथा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मौसम नूर भी उपस्थित थीं.
खानचौधरी ने जिले के तमाम नेताओं तथा विधायकों के बीच संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मालदा में कांग्रेस ने जीत का रिकार्ड कायम किया है. कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम तथा हर समय ही मालदावासियों के दुख-सुख में साथ होने की वजह से दोनों ही केंद्रों पर एक बार फिर से कांग्रेस की जीत हुई है. उन्होंने इस जीत के लिए मालदा के लोगों का आभार प्रकट किया. खानचौधरी ने कहा कि मालदा में इससे पहले स्वर्गीय गनी खान चौधरी ने भी काफी काम किये हैं. वह जब तक जीवित थे, हमेशा ही मालदा के लोगों के साथ रहे.
उन्होंने कहा कि गनीखान चौधरी द्वारा दिखायी गयी दिशा की बदौलत ही वे लोग आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने यहां जो विकास का काम शुरू किया था, वह जारी है. इसी वजह से मालदा के लोगों ने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा है. देश भर में कांग्रेस की हालत पतली हुई, लेकिन मालदा के दोनों लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की जीत एक बड़ी बात है. उन्होंने आनेवाले दिनों में मालदा की तमाम समस्याओं को दूर करने की भी बात कही.
खान चौधरी ने कहा कि जिले में नदी का कटाव, पानी में आर्सेनिक निकलना, सड़कों की बदहाल दशा, बिजली की कमी सहित अनेक समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है. उन्होंने आम लोगों के साथ जनसंपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया. पूरे देश में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के सवाल पर उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से कांग्रेस की इतनी बड़ी हार हुई है. केंद्र की यूपीए-2 सरकार महंगाई रोकने में कामयाब नहीं रही, जिसकी वजह से जनता का समर्थन धीरे-धीरे खत्म हो गया. उन्होंने यह भी माना कि गंठबंधन सरकारों के दौर से भी लोग तंग आ चुके हैं. लोगों की इच्छा अब दिल्ली में किसी एक दल को बहुमत देने की थी. इसी वजह से भाजपा को अपने दम पर इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि मनमोहन सरकार में शामिल विभिन्न दलों के मंत्री कई प्रकार के घोटाले तथा भाई-भतीजावाद में शामिल रहे. इसकी कीमत कांग्रेस को चुकानी पड़ी.
