आसनसोल: कुल्टी में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी सभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदी भाषियों को राज्य में मेहमान कहा था. इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने क ड़ी टिप्पणी की है. कुछ ने इसे भाषाई विवाद से जुड़ा मामला बताते हुए चुनाव आयोग से इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
पूर्व सांसद व सीपीआई के बर्दवान जिलासचिव आरसी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता को राज्य के इतिहास की जानकारी नहीं है और वे गलत बयानी कर रही है. हिंदीभाषियों ने इस राज्य में खुद को कभी मेहमान नहीं समझा, बल्कि अपना कर्मक्षेत्र समझा. इसके विकास में अपनी पूर्णाहुति दी. कोयला खनन से लेकर कोलकाता की ट्राम तथा वरीय प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर व्यवसाय के शीर्ष पर हिंदी भाषी मातृभूमि की तरह कार्य कर रहे हैं. सच्चाई यह है कि इनके बिना राज्य का इतिहास और विकास दोनों अधूरा है. लेकिन उन्हें मेहमान कह कर मुख्यमंत्री ने उन्हें अपमानित किया है. उन्होंने कहा कि उनका बयान भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तथा मनसे नेता राज ठाकरे की तरह क्षेत्रीय सांप्रदायिकता से प्रभावित है. कविगुरु रवींद्र नाथ टैगोर व विद्रोही कवि नजरूल की यह घरती ऐसी विचारधारा को कभी भी पल्लवित नहीं होने देगी. चुनाव आयोग को इसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रार्थी इंद्राणी मिश्र ने कहा कि मेहमान तो तृणमूल प्रत्याशी दोला सेन है. यह हिंदी भाषियों की धरती है. आसनसोल सहित पूरे राज्य को इस मुकाम में पहुंचाने वाला कोई और नहीं हिंदी बोलनेवाले लोग है. कोयलाचंल क्षेत्र में धरती के गर्भ से काला हीरा निकालने वाला हिंदी भाषी ही हैं. ममता बनर्जी ने हिंदी भाषियों का अनादर किया. मेहमान तो वे होते है जो कुछ समय के लिये आते है और चले जाते है. दोला सेन यहां मेहमान के रूप में आयी है, वोट लेगी इसके बाद चली जायेगी. मिथुन चक्रवर्ती मेहमान के रूप में आये थे.
इंटक नेता हरजीत सिंह ने कहा कि जो हिंदी भाषी तीन-चार पुश्त से यहां रह रहे है, जिनका जन्म यहीं हुआ और जो इसी राज्य से अपना रोजगार चला रहे है. वो यहां के वासी है. उन्होंने कहा कि जो इस मिट्टी की विरासत से जुड़े है, उन्हें मेहमान बताया जा रहा है, लेकिन सीमा पार क्षेत्र से जो कटीले तार लांघ कर राज्य में प्रवेश कर रहे है, उन्हें राज्य का वासी बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस तरह का भाषण शोभा नहीं देता. उन्हें राज्य की मुख्यमंत्री बनाने में हिंदीभाषियों का निर्णायक योगदान रहा है. उन्हें अपने इस कथन को वापस लेना चाहिए और इससे हिंदी भाषियों को लगी ठेस का जवाब देना चाहिए. ममता बनर्जी ने इस कथन से यह साबित कर दिया की भाजपा के नरेंद्र मोदी और तृणमूल की ममता बनर्जी में कोई फर्क नहीं हैं.
हिंदी उत्थान मोरचा के संस्थापक राजेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हिंदी भाषियों को मेहमान कह उन हिंदी भाषियों का अपमान की है, जो यहां जन्मे, पढ़े और बढ़े. ऐसा कथन मौलिक अधिकार का हनन है. इससे हिंदी भाषियों को अघात पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता यह कहते हुए भूल गयी हैं कि वह आज जहां हैं, वहां तक उन्हें पहुंचाने में हिंदी भाषियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. मुख्यमंत्री ने हिंदी भाषियों को अपने ही राज्य में मेहमान बना दिया. इससे अधिक आपत्तिजनक टिप्पणी और क्या हो सकती है?
