UP News: कानपुर के ऐतिहासिक जागेश्वर धाम स्थित 300 साल पुराने अखाड़े में 309वां वार्षिक दंगल सोमवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. सावन के दूसरे सोमवार पर आयोजित इस कुश्ती महासंग्राम में देश भर के नामी पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया. मैदान में मौजूद 10 हजार से अधिक दर्शकों ने कुश्ती के रोमांचक दांव-पेचों का भरपूर लुत्फ उठाया. यह अखाड़ा न केवल खेल का केंद्र है, बल्कि इसका अपना एक गौरवशाली अतीत भी रहा है, जिससे कई ऐतिहासिक कहानियां जुड़ी हुई हैं.
महिला पहलवान पूनम ने तकनीक से जीता मुकाबला
दंगल का सबसे बड़ा आकर्षण दिल्ली की महिला पहलवान पूनम और बांदा के पुरुष पहलवान जय सिंह के बीच हुआ मुकाबला रहा. तीन मिनट से अधिक चले इस कड़े संघर्ष में पूनम ने शानदार तकनीक का परिचय दिया. उन्होंने अंतिम 13 सेकंड में लगातार तीन बार पटकनी देकर पुरुष पहलवान को चित कर दिया. इस अद्भुत प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसके बाद दंगल समिति ने पूनम को 5,000 रुपये का विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया.
दर्जनों मुकाबले और एक लाख रुपये तक का इनाम
इस दंगल प्रतियोगिता के दौरान कुल 55 कुश्ती के रोमांचक मुकाबले आयोजित किए गए, जिनमें महिला पहलवानों के 6 विशेष मैच शामिल थे. आयोजकों ने पहलवानों का उत्साह बढ़ाने के लिए आकर्षक पुरस्कार राशि रखी थी, जिसमें सबसे बड़ी इनामी राशि 1 लाख रुपये तय की गई थी. हालांकि, भूटान के प्रसिद्ध पहलवान टिमटिम डोगरा पैर में चोट लग जाने के कारण इस बार मैदान में नहीं उतर सके, जिससे उनके प्रशंसकों को थोड़ी निराशा हाथ लगी.
स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ा अखाड़े का ऐतिहासिक इतिहास
आयोजक जितेंद्र पांडेय के अनुसार कुछ असमाजिक तत्वों ने अव्यवस्था फैलाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण आयोजन शांतिपूर्ण रहा. इस अखाड़े का इतिहास बेहद प्रेरणादायक है, जहां कभी नाना राव पेशवा, रानी लक्ष्मीबाई और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने कुश्ती के दांव-पेच सीखे थे. ऐतिहासिक परंपरा और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को समेटे यह दंगल आज भी युवाओं में खेल के प्रति जोश और देशभक्ति का नया जज्बा भरता है.
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