UP Startup Scheme: उत्तर प्रदेश में अपना स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए योगी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. नई स्टार्टअप नीति के तहत सरकार शुरुआती तीन साल तक कर्मचारियों के EPF और ESI में कंपनी की ओर से जमा होने वाली राशि का खर्च उठाएगी. सरकार का मकसद नए कारोबार को शुरुआती दौर में आर्थिक सहारा देना और ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करना है.
तीन साल तक कंपनी के हिस्से का EPF-ESI देगी सरकार
नई नीति के तहत स्टार्टअप शुरू करने वाली कंपनियों को शुरुआती तीन वर्षों में कर्मचारियों के EPF और ESI का कंपनी की ओर से दिया जाने वाला पैसा खुद नहीं उठाना पड़ेगा. यह खर्च सरकार वहन करेगी. इस फैसले से खासतौर पर शुरुआती दौर में काम कर रही उन कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके लिए कर्मचारियों का खर्च एक बड़ी चुनौती होता है.
पेटेंट कराने पर 50 लाख रुपये तक की मदद
योगी सरकार ने सिर्फ कर्मचारियों से जुड़े खर्च में राहत देने का ऐलान नहीं किया है. स्टार्टअप को इनोवेशन और नई तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए पेटेंट कराने के खर्च में 50 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी. इससे नए आइडिया पर काम करने वाले युवाओं और कंपनियों को अपने इनोवेशन को कानूनी रूप से सुरक्षित कराने में आर्थिक मदद मिलेगी.
नई कंपनियों के साथ रोजगार पर भी फोकस
सरकार की नई स्टार्टअप नीति का फोकस सिर्फ नई कंपनियां खड़ी करने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए कारोबार के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जा रहा है. शुरुआती वर्षों में EPF-ESI का खर्च कम होने से स्टार्टअप कंपनियों को अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और टीम तैयार करने में मदद मिल सकती है.
युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए मिलेगा सहारा
सरकार की ओर से दी जाने वाली इन सुविधाओं का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है. EPF-ESI में राहत और पेटेंट पर आर्थिक सहायता जैसे प्रावधान स्टार्टअप के शुरुआती खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं. नई नीति के जरिए योगी सरकार उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और रोजगार का माहौल मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
