UP के इस थाने में सिपाही की जगह मुर्गे करते हैं पहरेदारी! दरोगा भी नहीं लेते इनसे पंगा, जानिए पूरी कहानी

UP News: बलिया के एक थाने में पुलिसकर्मियों से ज़्यादा मुर्गे दिखते हैं. ये मुर्गे वहां की एक अनोखी परंपरा का हिस्सा हैं, जिन्हें शहीद बाबा की मज़ार पर चढ़ाया गया है.

UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक ऐसा थाना है, जहां पुलिसकर्मियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मुर्गे भी परिसर में घूमते नजर आते हैं. यह कोई सामान्य मुर्गी पालन केंद्र नहीं, बल्कि सिकंदरपुर थाना है. थाने के भीतर मौजूद एक मजार से जुड़ी मान्यता के कारण यहां चढ़ाए गए मुर्गों को खुला छोड़ दिया जाता है. स्थानीय लोगों के लिए थाने का यह नजारा आज भी कौतूहल का विषय है.

थाने में आखिर क्यों घूमते हैं इतने मुर्गे?

सिकंदरपुर थाने में मौजूद शहीद बाबा की मजार को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आस्था जुड़ी हुई है. पुरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लोग यहां मन्नत पूरी होने पर जिंदा मुर्गे चढ़ाते और उन्हें परिसर में छोड़ देते हैं. समय के साथ ऐसे मुर्गों की संख्या बढ़ती गई और थाना परिसर उनका स्थायी ठिकाना बन गया. सुबह से शाम तक ये मुर्गे थाना परिसर में इधर-उधर घूमते, दाना चुगते और आपस में लड़ते नजर आते हैं. खास बात यह है कि इन्हें आम तौर पर नुकसान नहीं पहुंचाया जाता.

नई तैनाती पर पहले मजार में हाजिरी!

सिकंदरपुर थाने से जुड़ी पुरानी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यहां नई तैनाती पाने वाले पुलिसकर्मी भी शहीद बाबा की मजार पर हाजिरी लगाते हैं. मान्यता के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मी मजार पर मुर्गा और चादर चढ़ाते हैं. इसके पीछे विश्वास बताया जाता है कि बाबा की कृपा से नौकरी और परिवार में कुशल-मंगल बना रहता है. हालांकि, यह स्थानीय आस्था और मान्यता है, इसकी कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं है.

‘मुर्गों’ को कोई क्यों नहीं छेड़ता?

थाना परिसर में घूमने वाले इन मुर्गों को लेकर स्थानीय लोगों में ऐसी मान्यता है कि ये शहीद बाबा को समर्पित हैं. इसी कारण इन्हें मारना या खाना उचित नहीं माना जाता. एक स्थानीय वीडियो रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि पुलिसकर्मी इन मुर्गों को दाना खिलाते हैं और वे परिसर में बेखौफ घूमते रहते हैं. यही वजह है कि सिकंदरपुर थाने में पहुंचने वाले फरियादियों की नजर कई बार पुलिसकर्मियों से पहले इन मुर्गों पर पड़ जाती है.

थाने की पहचान बन चुकी है मजार और मुर्गे

सिकंदरपुर थाने की यह कहानी नई नहीं है. 2011 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में भी थाना परिसर में सैकड़ों मुर्गों के घूमने और शहीद बाबा की मजार पर मुर्गे चढ़ाए जाने की परंपरा का उल्लेख किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, तैनाती के दौरान किसी संकट से उबरने के बाद भी कुछ पुलिसकर्मी मजार पर मुर्गा चढ़ाते थे. यानी पुलिस थाना, मजार और खुलेआम घूमते मुर्गे—इन तीनों का यह अनोखा मेल सिकंदरपुर की एक अलग पहचान बन चुका है.

पुलिस से ज्यादा चर्चा में रहते हैं मुर्गे

आम तौर पर थाने का मतलब पुलिस, वर्दी, हथकड़ी और कानून-व्यवस्था से होता है. लेकिन सिकंदरपुर थाने में पहुंचते ही नजारा कुछ अलग दिखाई देता है. यहां पुलिसकर्मियों के बीच घूमते मुर्गे लोगों का ध्यान खींचते हैं. यही वजह है कि सिकंदरपुर थाना आज भी यूपी के उन अनोखे थानों में गिना जाता है, जिसकी कहानी पुलिस की कार्रवाई से ज्यादा उसके परिसर में घूमते मुर्गों और शहीद बाबा की मजार से जुड़ी मान्यता के कारण चर्चा में रहती है.

यह भी पढ़ें: Janmashtami 2026: मथुरा-वृंदावन की वो रहस्यमयी जगह, जहां सूर्य ढलते ही बंद हो जाते हैं दरवाजे! मान्यता- आज भी राधा-कृष्ण रचाते हैं रासलीला

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >