UP Politics: एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुरादाबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में मस्जिदों, दरगाहों, मजारों और कब्रिस्तानों को निशाना बनाया जा रहा है. ओवैसी ने दावा किया कि प्रशासन धार्मिक स्थलों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर रहा है और सरकार को इस पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और कानून के अनुसार कार्रवाई होना जरूरी है.
ठाकुरद्वारा के 36 धार्मिक स्थलों का किया जिक्र
ओवैसी ने अपने संबोधन में मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा तहसील का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्व विभाग ने 36 मस्जिद, मदरसे, मजार और कब्रिस्तान को हटाने के लिए सूची तैयार की है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये धार्मिक स्थल वर्षों से अस्तित्व में हैं तो इन्हें हटाने का कानूनी आधार क्या है. उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई की जा रही है.
वक्फ कानून पर सरकार से मांगा जवाब
ओवैसी ने वक्फ संपत्तियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लंबे समय से मौजूद धार्मिक स्थलों के अधिकारों की रक्षा कानून के अनुसार होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मस्जिदों और दरगाहों को सरकारी जमीन बताकर नोटिस जारी किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल का वर्षों पुराना रिकॉर्ड है तो उसके खिलाफ कार्रवाई से पहले सरकार को कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
समाजवादी पार्टी की चुप्पी पर उठाए सवाल
जनसभा के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया. उन्होंने ठाकुरद्वारा से सपा विधायक नवाब जान खान का नाम लेते हुए कहा कि यदि उनके क्षेत्र में धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है तो उन्हें खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए. ओवैसी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएं और इस तरह के मामलों पर चुप न रहें.
बुलडोजर कार्रवाई पर भी की टिप्पणी
ओवैसी ने प्रदेश सरकार की बुलडोजर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कठोर प्रशासनिक कदमों के बावजूद मुस्लिम समुदाय अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आवाज उठाता रहेगा. उन्होंने अपने समर्थकों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है और अधिकारों की लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर जारी रहेगी.
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