UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का वक्त बचा है और सियासी दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं. आमतौर पर चुनाव आते ही जाति और धर्म के मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ जाते हैं, लेकिन इस बार बहुजन समाज पार्टी की नजर युवा वोटरों, खासकर Gen Z पर है. पार्टी अपने राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को युवाओं के बीच मजबूत चेहरा बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है. बसपा में बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी रहने के बीच यह रणनीति पार्टी के लिए अहम मानी जा रही है. मायावती बदले सियासी माहौल को भांपते हुए युवाओं के मुद्दों पर जोर दे रही हैं, वहीं आकाश आनंद भी अपनी सभाओं में नई पीढ़ी से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठा रहे हैं.
दिल्ली के Gen Z प्रदर्शन के बाद बदला सियासी फोकस
दिल्ली के जंतर-मंतर पर Gen Z के प्रदर्शन के बाद युवा वर्ग को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी है. इस बदले माहौल में पुराने जातीय और धार्मिक सियासी दांव-पेंच के साथ अब युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश भी तेज हो गई है. बसपा भी इस बदलाव से खुद को अलग नहीं रख रही है. पार्टी युवाओं को आकर्षित करने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है और आकाश आनंद को इस अभियान का प्रमुख चेहरा बनाने की कोशिश की जा रही है.
हाथरस की सभा में आकाश आनंद ने Gen Z को लेकर दिखाया आक्रामक तेवर
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में आयोजित जनसभा में Gen Z को लेकर आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखी. इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी अब युवा वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर खास ध्यान दे रही है. आकाश आनंद को पहले से ही बसपा में युवा नेतृत्व के चेहरे के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में पार्टी की नई रणनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है.
मायावती ने भी युवाओं की जवाबदेही की मांग को बताया अहम
बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जारी अपने संदेश में भी युवा पीढ़ी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ और ‘मेरा भारत महान’ जैसे सपनों को साकार करने की क्षमता युवा पीढ़ी में है. मायावती के मुताबिक, युवा अब सरकारों से जवाबदेही मांग रहा है और चाहता है कि संविधान में संवैधानिक संस्थाओं के लिए बनाई गई ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम करे, ताकि कोई भी निरंकुश न हो सके.
30 साल से कम उम्र की आबादी पर मायावती का जोर
मायावती ने अपने संदेश में कहा कि देश की आबादी का करीब 52 फीसदी हिस्सा 30 वर्ष से कम उम्र का है. ऐसे में सरकारों के लिए युवा वर्ग की उम्मीदों और सवालों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि युवा अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने की वजह से व्यवस्था में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने को लेकर वह और मुखर हो गया है.
स्कूल, अस्पताल और सड़क जैसे मुद्दों पर जवाब चाहता है युवा
बसपा सुप्रीमो ने युवाओं की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी बेहतर स्कूल, अस्पताल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं चाहती है. इसके लिए वह शासन और प्रशासन से जवाब मांग रही है. मायावती के संदेश में यह भी कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सभी सरकारों को सतर्क हो जाना चाहिए. ऐसे में यूपी चुनाव से पहले बसपा का युवा वर्ग पर बढ़ता फोकस पार्टी की रणनीति में एक अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
जातीय समीकरण के साथ Gen Z को साधने की कोशिश
बसपा की राजनीति लंबे समय से सामाजिक और जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द रही है. अब पार्टी उसी आधार के साथ युवा वर्ग को जोड़ने की कोशिश करती दिख रही है. आकाश आनंद को Gen Z के बीच सक्रिय करने और मायावती के स्तर से युवा मुद्दों को उठाने की रणनीति इसी दिशा का संकेत देती है. अब देखना होगा कि करीब छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा की यह नई रणनीति युवाओं के बीच कितना असर छोड़ पाती है.
