Agra Railway News: उत्तर प्रदेश के आगरा रेल मंडल में चूहों से यात्रियों और रेलवे को लगातार परेशानी हो रही है. चूहों और कीटों के नियंत्रण के लिए रेलवे पिछले सात वर्षों में करीब 70 लाख रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. चूहे रेलवे की वायरिंग, केबल, सीट, कंबल और चादरों को नुकसान पहुंचाने के साथ यात्रियों के सामान को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. जनवरी से अगस्त तक रेलवे हेल्पलाइन पर चूहों से जुड़ी 15 शिकायतें भी मिल चुकी हैं.
70 लाख खर्च, फिर भी नहीं थमा आतंक
आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम के मुताबिक, वर्ष 2019 से 30 जून 2023 तक पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल पर 41,37,547 रुपये खर्च किए गए. इसके बाद जुलाई 2023 में 35,46,384 रुपये का नया अनुबंध किया गया, जो 30 जून 2027 तक प्रभावी है. इस तरह अब तक करीब 70 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और जून 2027 तक यह राशि 76.83 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
यार्ड से कोच तक चूहों के बिल
कैंट और आगरा फोर्ट यार्ड, वॉशेबल एप्रन और ट्रैक के किनारे चूहों के बिल बने हुए हैं. चूहे ट्रेनों के कोच में पहुंचकर वायरिंग, केबल, सीट और यात्रियों के सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं. पेस्ट कंट्रोल के तहत कॉकरोच, खटमल, मच्छर, मक्खी और दीमक जैसे कीड़ों को नियंत्रित किया जाता है, जबकि रोडेंट कंट्रोल में चूहों के बिल और आवाजाही वाले स्थानों का ट्रीटमेंट किया जाता है. रेलवे के अनुसार जनवरी से अगस्त के बीच मिली 15 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है.
फर्स्ट एसी में बुजुर्ग की नाक काटी
22 अगस्त की रात ऊना हिमाचल-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट एचपी करण की नाक पर चूहे ने काट लिया. वह चंडीगढ़ से इंदौर जा रहे थे. आगरा कैंट स्टेशन पर रात करीब 1:55 बजे मेडिकल स्टाफ ने उनका प्राथमिक उपचार किया. इससे पहले 30 जुलाई को होशियारपुर-आगरा एक्सप्रेस के ए-2 कोच में समाजसेवी कृष्ण अरोड़ा ने भी चूहों की शिकायत की थी. उनके मुताबिक, होशियारपुर से मथुरा तक चूहे सीट और सामान के बीच दौड़ते रहे, जिसके बाद उनकी सीट बदली गई.
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